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Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ - #NCSOLVE 📚

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Chapter-wise Class 7 SST NCERT Solutions and Class 7 Social Science Chapter 12 Question Answer Hindi Medium बाजारों की समझ are useful for focused study.

Class 7 Social Science Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ

बाजारों की समझ Question Answer in Hindi

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 12 के प्रश्न उत्तर बाजारों की समझ

प्रश्न 1.
बाजार क्या होते हैं और वे कैसे कार्य करते हैं? ( पृष्ठ 247)
उत्तर:
बाज़ार एक ऐसी जगह या माध्यम है, जहाँ खरीददार (क्रेता) और विक्रेता वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करते हैं, जो भौतिक या ऑनलाइन हो सकता है। जहाँ कीमतें इस बात पर निर्भर करती हैं कि कोई चीज़ कितनी उपलब्ध है और लोगों को उसकी कितनी जरूरत है? खरीददार और विक्रेता के बीच प्रतिस्पर्धा भी कीमतों और नवाचार को प्रभावित करती है।

बाजार कैसे काम करता है?
(i) क्रेता और विक्रेता का मिलन मंचबाज़ार वह मंच है, जहाँ खरीददार और विक्रेता मिलते हैं। खरीददार अपनी जरूरतें बताते हैं और विक्रेता उन्हें पूरा करने के लिए उत्पाद और सेवाएँ देता है।

Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ

(ii) आपूर्ति और माँग

  • आपूर्ति-विक्रेता बाज़ार में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करते हैं।
  • माँग-खरीददार उन वस्तुओं और सेवाओं की माँग करते हैं। इन दोनों के बीच का संतुलन ही वस्तुओं और सेवाओं की कीमत और मात्रा को तय करता है। जब माँग ज्यादा होती है और आपूर्ति कम होती है, तो कीमत बढ़ जाती है।

(iii) मूल्य निर्धारण

  • आपूर्ति और माँग के बीच संतुलन की स्थिति में, बाज़ार कीमतों को एक ऐसे बिंदु पर लाने का प्रयास करता है, जहाँ खरीददार और विक्रेता दोनों संतुष्ट हों।
  • बाज़ार में होने वाली प्रतिस्पर्धा और बातचीत से वस्तुओं की अंतिम कीमत तय होती है।

(iv) प्रतिस्पर्धा

  • जब किसी बाज़ार में कई विक्रेता होते हैं, तो वे अपनी चीज़ों को बेचने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं।
  • यह प्रतिस्पर्धा कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मद्द करती है और विक्रेताओं को अपने उत्पादों और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करती है।

प्रश्न 2.
व्यक्तियों के जीवन में बाजारों की क्या भूमिका है? (पृष्ठ 247)
उत्तर:
बाज़ार लोगों की जरूरतों को पूरा करने में मदद करके, रोज़गार के अवसर पैदा करने और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का काम करते हैं। बाजार उत्पादकों को उपभोक्ताओं से जोड़ते हैं। वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं, जिससे लोगों को आवश्यक सामान आसानी से प्राप्त होता है।
बाजार की मुख्य भूमिकाएँ:

  • जरूरतों की पूर्ति-बाज़ार वह जगह है जहाँ से लोग अपनी दैनिक जरूरतें जैसे-सब्जियाँ, फल, कपड़े और अन्य घरेलू सामान खरीदते हैं।
  • आर्थिक अवसर-बाज़ार व्यवसायों और लोगों के लिए आय का स्रोत होते हैं। वे व्यापारियों और कारीगरों को अपना सामान बेचने और रोज़गार प्रदान करने का अवसर देते हैं।
  • आर्थिक विकास-बाज़ार अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। य वस्तुआ आर सवाआ के मूल्य निधरण और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में तरलता बनी रहती है।
  • उत्पादक-उपभोक्ता संबंध-बाज़ार उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ते हैं, जिससे दोनों पक्षों को लाभ होता है। उपभोक्ता अपनी जरूरत की चीज़ें खरीद पाते हैं और उत्पादक अपना सामान बेच पाते हैं।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व-कई बाज़ार सिर्फ खरीददारी की जगह नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र भी होते हैं। ये लोगों को इकट्ठा होने, बातचीत करने और एक-दूसरे से जुड़ने का मौका देते हैं।

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प्रश्न 3.
सरकार बाजारों में क्या भूमिका निभाती है? ( पृष्ठ 247)
उत्तर:
बाज़ारों में सरकार की मुख्य भूमिका नियमन करना, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना, बाज़ार की विफलताओं को ठीक करना, सार्वजनिक वस्तुओं का प्रावधान करना तथा सामाजिक और अर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देना है। ये कार्य सरकार को यह सुनिश्चित करने में मद्द करता है कि बाज़ार कुशलता से काम करें और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो।
बाजार में सरकार की भूमिका:

  • नियमन और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा-सरकार बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिए नियम बनाती है ताकि एकाधिकार या अनुचित व्यापार व्यवहारों को रोका जा सके।
  • बाज़ार की विफलता को ठीक करनासरकार बाहरी प्रभावों या सार्वजनिक वस्तुओं की कमी जैसी बाज़ार की विफलताओं को ठीक करने के लिए हस्तक्षेप करती है।
  • सार्वजनिक वस्तुएँ प्रदान करना-सरकार ऐसी सेवाएँ प्रदान करती है जिनकी माँग बाज़ार के आधार पर पूरी नहीं हो सकती। जैसे कि-बुनियादी ढाँचा और सार्वजनिक शिक्षा।
  • आय का पुनर्वितरण-सरकार करों और भुगतानों के माध्यम से आय को एक वर्ग से दूसरे वर्ग में पुनर्वितरित कर सकती है, जिससे आय की असमानता कम हो।
  • आर्धिक स्थिरता और विकास-सरकार अपनी राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के माध्यम से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का प्रयास करती है।
  • उपभोक्ता और पर्यावरण की सुरक्षासरकार वस्तुओं और सेवाओं के लिए गुणवत्ता मानकों को निर्धारित करती है और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नियम बनाती है।

प्रश्न 4.
उपभोक्ता अपनी क्रय की गई वस्तुओं तथा सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन किस प्रकार कर सकते हैं? (पृष्ठ 247)
उत्तर:
उपभोक्ता विभिन्न तरीकों से खरीदे गए सामानों और सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन कर सकते हैं, उत्पाद के लेबल और प्रमाणन चिह्नों की जाँच कर सकते हैं, ऑनलाइन समीक्षाएँ पढ़ सकते हैं और अन्य उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया की तुलना कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, वे खरीददारी से पहले कीमतों और विशेषताओं की तुलना करके और ब्रांड का आकलन करके गुणवत्ता का मूल्यांकन कर सकते हैं।
उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करने के तरीके:

(i) उत्पाद संबंधी जानकारी की जाँच करें

  • खरीददारी से पहले उत्पाद के लेबल और ब्रोशर पर दी गई जानकारी पढ़ें।
  • मानकीकृत चिह्नों वाले उत्पादों को चुनें, क्योंकि यह गुणवत्ता का संकेत देता है।
  • ऑनलाइन समीक्षाएँ और रेटिंग देखें। ये उत्पाद और सेवा के बारे में बहुमूल्य प्रतिक्रिया प्रदान करते हैं।
  • गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ISO/ IECI7025 प्रमाणित प्रयोगशालाओं द्वारा किए गए परीक्षणों और प्रमाणपत्रों पर भरोसा करें।

(ii) ग्राहक प्रतिक्रिया और संतुष्टि का विश्लेषण करें

  • सेवा की गुणवत्ता को मापने के लिए ऑनलाइन सर्वेक्षणों का उपयोग करें।
  • ग्राहक संतुष्टि के स्तर को मापने के लिए ऑनलाइन सर्वेक्षणों का उपयोग करें।
  • ऑनलाइन समीक्षाओं का उपयोग करके यह समझें कि ग्राहक उत्पाद या सेवा के बारे में क्या सोचते हैं और क्या वे फिर से खरीददारी करेंगे?

(iii) खरीददारी से पहले शोध करें

  • विभिन्न दुकानों और बाज़ारों में उपलब्ध वस्तुओं और संवाओं की कीमतों और विशेषताओं की तुलना करें।
  • विभिन्न ब्रांडों की विशंपताओं और मृत्यों का समझे।

(iv) अपने अनुभव का विश्लेषण करें

  • खरीददारी के बाद उत्पाद या संवा की गुणवत्ता की अपनी अपेक्षाओं के साथ तुलना करें।
  • अस्वीकृत या खराब प्रदर्शन वाले उत्पादों से मिली प्रतिक्रिया को विश्लेषित करें ताकि आप भविष्य में खरीददारी के निर्णय में सुधार कर सके।

आइए पता लगाएँ ( पृष्ठ 251)

प्रश्न 1.
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि यह बाजार अपनी समृद्धि की चरम सीमा पर कैसा रहा होगा?
उत्तर:
हाँ, मैं निश्चित रूप से इसकी कल्पना कर सकता हूँ। यह हंपी बाज़ार है, अपने चरम के दौरान यह इंद्रियों के लिए एक दावत रहा होगा। 14 वीं से 16 वीं शताब्दी के दौरान-विजयनगर साम्राज्य की चरमावस्था में, यह कोई साधारण बाज़ार नहीं था।
Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ 1

इसमें चौड़ी सड़क के दोनों ओर विशाल पत्थर के मंडप थे, जिनमें से प्रत्येक में जटिल नक्काशीदार स्तंभ थे, जिनका उपयोग जौहरी. मसाला व्यापारी और कपड़ा व्यापारी दुकानों के रूप में करते थे।

हर ओर चमकती हुई वस्तुएँ देखी जा सकती थी, दक्षिण से रेशम, मोती, खाड़ी से आए सामान, अरब से आए घोड़े, बुनी हुई टोकरियों में ढेर सारे मसाले और चमकते रत्न। विदेशी यात्रियों ने भी बाज़ार की समृद्धता के बारे में वर्णन किया। यह सोचना वास्तव में आश्चर्यजनक है कि वह स्थान कितना जीवंत रहा होगा।

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प्रश्न 2.
क्या आप अपने राज्य में किन्हीं पुराने बाजारों के बारे में जानते हैं? वे वर्तमान बाजारों से किस तरह समान या भिन्न होंगे? अपने परिवार और समुदाय के वरिष्ठजनों के साथ चर्चा कीजिए। ( पृष्ठ 251)
उत्तर:
नई दिल्ली में लाल किले में स्थित मीना बाज़ार एक पुराने बाजार के उदाहरण हैं। यह हमें एक पुराने बाज़ार, खासकर मुगल काल में, पुराने बाज़ार कैसे संचालित होते थे? उसका एक ज्वलंत उदाहरण पेश करते हैं। आज भी वह बाज़ार जीवंत है। उन दिनों यह केवल शाही लोगों के लिए था। लेकिन वर्तमान में यह सभी के लिए खुला है और लाल किले में आने वाले बहुत-से पर्यटक वहाँ से रेशम, हस्तशिल्प और दुर्लभ कलाकृतियाँ खरीदते हैं।

प्रश्न 3.
चित्र का अवलोकन कीजिए। ये व्यक्ति क्या चर्चा कर रहे हैं? कल्पना कीजिए कि आप और आपका साथी अमरूद के क्रेता और विक्रेता हैं। आप दोनों के बीच हुए संवाद को एक नाटक के रूप में तैयार करके अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। (पृष्ठ 251)
Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ 2
उत्तर:
यहाँ खरीददार और विक्रेता के रूप में दो छात्रों के बीच संवादों के साथ एक स्क्रिप्ट (कथानक) दी गई है।
पात्र-
विक्रेता (छात्र 1): एक हँसमुख फल विक्रेता जिसके पास अमरुद से भरी एक ठंलागाड़ी है।
ग्राहक ( छात्रा 2): एक मजाकिया, मोल-भाव पसंद करने वाला खरीददार।
दृश्य शुरू होता है: एक व्यस्त सड़क का कोना। राजू अपनी गाड़ी पर चमकीले हरे अमरूद सजा रहा है और बिक्री के लिए जोर-जोर से चिल्ला रहा है।
विक्रेता (छात्र 1) (मजाकिया लहजे में)”खरीदो! ताज़े अमरुद! शहद जैसे मीठे, मक्खन जैसे मुलायम! सिर्फ 80 रुपए किलो।”
ग्राहक (छात्रा 2)-(आगे बढ़ते हुए, अमरूदों को देखते हुए) “हम्म ……. ये अच्छे लग रहे हैं, लेकिन 80 रुपए किलो? यह तो बहुत ज्यादा है। ₹ 50 में दे दो।”
विक्रेता (छात्र 1 ) (थोड़ा नाटकीय अंदाज में)” 50 ? मैडम, ये सिर्फ अमरूद नहीं है, ये कोहिनूर है! सीधे इलाहाबाद से लाए गए हैं। आपको यह स्वाद कहीं और नहीं मिलेगा!”
ग्राहक (छात्रा 2) (छेड़ते हुए)-” अमरूद तो सब्जी मंडी में भी मिलते हैं। आप ऐसे दाम लगा रहे हैं, जैसे आप इन्हें पेरिस से लाए हैं।”
विक्रेता (छात्र 1) (मुस्कराते हुए)-” पेरिस के नहीं. पर प्यार से दिए हैं। बस ये आपके लिए 75 रु. में।”
ग्राहक (छात्रा 2) (वापस मुस्कुराते हुए)-“फिर भी बहुत ज्यादा है। चलो इसे उचित बनाते हैं- 60 रुपए और मैं पूरा एक किलो ले लूँगी।”
विक्रेता (छात्र 1) (गहरा सोचने का नाटक करता है, फिर मुस्कुराता है)-“मैडम जी, आप मेरी माँ से बेहतर मोल-भाव करती हैं। ठीक है, सौदा पक्का। 60 रुपए,
लेकिन सिर्फ इसलिए क्योंकि आपकी मुस्कान अमरूद से मेल खाती है।”
ग्राहक (छात्रा 2) (हँसते हुए)-“तो पैक करो इससे पहले कि मैं अपना मन बदल लूँ।”
(वे हँसते हैं। राजू अमरूद पैक करता है, अनीता पैसे देती है। वे अलविदा कहते हैं।) (दृश्य समाप्त होता है।)
“हर बाजार में थोड़ा ड्रामा और मोल-भाव होता ही है।”

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प्रश्न 4.
प्रवाह चित्र 12.14 को ध्यान से देखिए और विनिर्माता या उत्पादक से उपभोक्ता तक वस्तुओं के प्रवाह का वर्णन कीजिए। इस प्रवाह में थोक विक्रेता और खुदरा विक्रेता की क्या भूमिका होती है? ( पृष्ठ 257)
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उत्तर:

  • निर्माता/उत्पादक उत्पाद करता है, या तो कच्चे माल की सोरिंग करके और उन्हें जोड़कर या उन्हें उगाकर/उत्पादित करके (जैसे कृषि या विनिर्माण में)। सामान आमतौर पर बड़ी मात्रा में उत्पादित किए जाते हैं।
  • थोक विक्रेता निर्माता से थोक में माल खरीदते हैं। माल को बड़े गोदामों में संग्रहीत करते हैं। फिर खुदरा विक्रेताओं के लिए उपयुक्त छोटी मात्रा में या बड़ी मात्रा में बेचते हैं। थोक विक्रेता अक्सर निर्माताओं और कई खुदरा| विक्रेताओं के बीच एक पुल के रूप में काम करते हैं, जिससे वितरण को सुव्यवस्थित करने में मद्द मिलती है।
  • खुदरा विक्रेता/थोक विक्रेताओं (या कभीकभी सीधे निर्माताओं से) से कम मात्रा में माल खरीदते हैं। सीधे अंतिम उपभोक्ता को बेचते हैं। ग्राहक सेवा, विपणन स्थान की सुविधा और उत्पाद वर्गीकरण के माध्यम से मूल्य जोड़ते हैं।
  • उपभोक्ता/ग्राहक अंतिम उपयोगकर्ता है जो व्यक्तिगत उपयोग के लिए उत्पाद खरीदता है।

प्रश्न 5.
अपने समीप स्थित खुदरा विक्रेता से किसी उत्पाद, उसके मूल स्थान और दुकान तक पहुँचने की प्रक्रिया में आपूर्तिकर्ताओं की श्रृंखला के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए। चित्र 12.14 में प्रवाह चित्र (फ्लो चार्ट) का उपयोग करके इसका पता लगाइए और इसे कक्षा में साझा कीजिए। ( पृष्ठ 262)
उत्तर:
उत्पाद: बिस्कुट का पैकेट
उत्पादन स्थानः पंजाब कारखाना, भारत

  • आपूर्तिकर्ताओं की शृंखला

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प्रश्न 6.
उपभोक्ता अब कम विद्युत-खपत करने वाले रेफ्रिजरेटर क्रय करना पसंद करते हैं। जब बड़ी संख्या में उपभोक्ता कम विद्युत-खपत करने वाले रेफ्रिजरेटर की माँग करने लगे हैं तो आपके विचार से चित्र 12.14 में दर्शाए गए नेटवर्क में क्या परिवर्तन होता है? ( पृष्ठ 263)
उत्तर:
जब बड़ी मात्रा में उपभोक्ता कम बिजली का उपयोग करने वाले रेफ्रिजरेटर पसंद करते हैं, तो संपूर्ण बाज़ार नेटवर्क प्रतिक्रिया करता है-

  • निर्माता माँग को पूरा करने के लिए अधिक ऊर्जा कुशल मॉडल का उत्पादन शुरू करते हैं।
  • खुदरा विक्रेता इन मॉडलों को अधिक सक्रिय रूप से स्टॉक करते हैं और बढ़ावा देते हैं।
  • आपूर्तिकर्ता तदनुसार कच्चे माल और पुर्जों को समायोजित करते हैं।
  • विज्ञापन खरीददारों को आकर्षित करने के लिए ऊर्जा-बचत सुविधाओं पर प्रकाश डालते हैं।
  • सरकार ऊर्जा रेटिंग और प्रोत्साहन के साथ इस प्रवृत्ति का समर्थन कर सकती है।

कुल मिलाकर उपभाक्ताओं की माँग बाजार को पर्यावरण के अनुकूल, ऊर्जा बचत उपकरणों की ओर ले जाती है, जिससे संपूर्ण आपूर्ति भृंखला प्रभावित होती है।

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प्रश्न 7.
क्या आपने अपने समुदाय या पड़ोस में ऐसी कोई प्रथा देखी है?उस प्रथा का वर्णन चित्र या लघु अनुच्छेद द्वारा कीजिए। (पृष्ठ 265)
उत्तर:
हाँ. मैंने अपने पड़ोस में ऐसी एक प्रथा देखी है। एक सब्जी विक्रेता है जो ग्राहकों को सब्जियाँ खरीदते समय हमेशा एक छोटा ताजा धनिया पत्ती का गुच्छा और कुछ हरी मिर्च मुफ्त में देता है। वह सद्भावना बनाने और अपने नियमित ग्राहकों को बनाए रखने के लिए एक दोस्ताना भाव के रूप में ऐसा करता है। यह छोटा-सा कार्य खरीददारों को महत्व महसूस कराता है और उन्हें अन्य विक्रेताओं के पास जाने के बजाय उसके पास लौटने के लिए प्रोत्साहित करता है।

प्रश्न 8.
प्याज़ भारत के अधिकांश भागों में भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुछ ऋतुओं में इसकी
आपूर्ति बाजार में कम हो जाती है। आपके विचार में ऐसा होने पर प्याज के मूल्यों पर क्या प्रभाव पड़ता है? (पृष्ठ 265)
उत्तर:
जब बाज़ार में प्याज की आपूर्ति कम हो जाती है, तो प्याज़ की कीमतें बहु जाती हैं। यह आपूर्ति-माँग के बुनियादी आर्थिक सिद्धांत के कारण होती है; जब किसी वस्तु की माँग स्थिर रहती है या बढ़ जाती है, लेकिन उसकी आपूर्ति कम हो जाती है, तो उसकी कीमत बढ़ जाती है। इस तरह की कमी बे-मौसम बारिश या फसल को हुए अन्य नुकसानों के कारण हो सकती है।

  • आपूर्ति की कमी-प्रतिकूल मौसम, जैसे कि बे-मौसम या लंबे समय तक बारिश, फसल को नुकसान पहुँचा सकती है, जिससे बाज़ार में प्याज की उपलब्ध मात्रा कम हो जाती है।
  • माँग में वृद्धि-प्याज भारत में एक मुख्य सख्जो है और इसकी माँग सभी माँसम के दौरान बनी रहती है।
  • परिणाम-आपूर्ति और माँग के इस असंतुलन के कारण, जो मात्रा उपलब्ध है, उसकी कीमत अधिक हो जाती है, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं।

प्रश्न 9.
अगर प्याज के आपूर्तिकर्ता आवश्यक मात्रा में प्याज बाजार में नहीं लाएँगे, तो क्या होगा? आपके विचार से सरकार को इस स्थिति में क्या करना चाहिए? (पृष्ठ 265)
उत्तर:
यदि प्याज की आपूर्ति कम हो जाती है, तो इससे प्याज की कीमतों में वृद्धि होगी और जमाखोरी हो सकती है। सरकार को जमाखोरी के खिलाफ कारंवाई करनी चाहिए, प्याज के आयात पर विचार करना चाहिए और किसानों को अपनी फसल को समय पर बाज़ार में लाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

प्याज की कमी के कारण होने वाले परिणाम-

  • कीमतों की वृद्धि-जब आपूर्ति घटती है, तो माँग पूरी न होने पर प्याज की कीमतें बहुत बढ़ जाती हैं।
  • जमाखोरी-बिचौलिए और व्यापारी लाभ कमाने के लिए प्याज की जमाखोरी कर सकते हैं, जिससे बाज़ार में और कमी हो जाती है।
  • उपभोक्ता असंतोष-आम उपभोक्ता के लिए प्याज खरीदना मुश्किल हो जाएगा, जिससे असंतोष फैल सकता है।

सरकार को क्या करना चाहिए?

  • जमाखोरी पर कार्रवाई-सरकार को जमाखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए और उन पर जुर्माना लगाना चाहिए।
  • आयात पर विचार-प्याज की कमी को दूर करने के लिए सरकार अन्य देशों से प्याज आयात करने पर विचार कर सकती है।
  • ब्राज़ार पर निगरानी-सरकार को बाज़ारों में प्याज की कीमतों और आपूर्ति पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
  • किसानों को प्रोत्माहन-सरकार किसानों को अपनी फसल सही समय पर बाज़ार में लाने के लिए प्रात्साहित करना चाहिए. ताकि जमाखोरी को रोका जा सके।
  • उपभोक्ता शिकायत निवारण-सरकार को एक एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना चाहिए जहाँ उपभोक्ता जमाखोरी या कीमतों के बारे में शिकायत कर सकें।

प्रश्न 10.
अपने घर में सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर बी.ई.ई. स्टार रेटिंग को जाँचें और उनकी विद्युत दक्षता के बढ़ते हुए क्रम में सारे उपकरणों का एक चार्ट तैयार करें। (पृष्ठ 269)
उत्तर:
अपने घर के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की ऊर्जा दक्षता के बढ़ते क्रम में एक चार्ट बनाने के लिए, पहले सभी उपकरणों पर बी.ई.ई. स्टार लेबल की जाँच करें, जहाँ 5 स्टार सबसे कुशल और 1 स्टार सबसे कम कुशल होते हैं। फिर, सभी उपकरणों को उनके स्टार रेटिंग के अनुसार सूचीबद्ध करें, सबसे कम रेटिंग वाले से शुरू करें और सबसे अधिक रेटिंग वाले तक जाएँ। उदाहरण के लिए, चार्ट कुछ इस तरह दिखेगा।

उपकरण — स्टार रेटिंग
i. एवर कंडीशनर — 2 स्टार
ii. वार्शिंग मशीन — 3 स्टार
iii. गीजर — 3 स्टार
iv. रेफ्रिजरेटर — 5 स्टार

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उपकरणों को चार्ट में कैसे व्यवस्थित करें?

  • सभी उपकरणों की सूची उनकी रेटिंग स्टार के आधार पर बना सकते हैं।
  • प्रत्येक रेटिंग स्टार की जाँच प्रत्येक उपकरण पर बी.ई.ई. स्टार लेबल पर देखकर नोट करें।
  • इन उपकरणों को उनकी स्टार रेटिंग के अनुसार व्यवस्थित करें। 5 स्टार सर्वोत्तम रेटिंग और 1 स्टार न्यूनतम को बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें।

आइए विचार करें ( पृष्ठ 252)

प्रश्न 1.
क्या आप किसी ऐसे बाजार के बारे में सोच सकते हैं, जहाँ मोल-तोल कम प्रचलित है और क्यों?
उत्तर:
हाँ, मॉल और हाई-एंड रिटेल स्टोर ऐसे बाजारों के उदाहरण हैं, जहाँ मोल-भाव कम होता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि

  • कीमतें तय होती हैं और बारकोड लगी होती है और पैकेजिंग पर एमआरपी छपी होती है।
  • उत्पाद ब्रांडेड होते हैं और कीमतें कंपनियों द्वारा निर्धारित की जाती है।
  • खरीददारी का अनुभव अधिक औपचारिक होता है और कर्मचारियों को कीमतें बदलने का अधिकार नहीं होता है।
  • इन बाज़ारों में ग्राहक आमतौर पर मोल-भाव करने की बजाय सुविधा और गुणवत्ता की उम्मीद करते हैं।
  • इसके विपरीत, स्थानीय बाज़ारों या सड़क के ठेलों पर मोल-भाव आम है, जहाँ कीमतें लचीली होती हैं।

प्रश्न 2.
साप्ताहिक बाजार में देर रात को सब्जियाँ दिन की तुलना में सस्ती हो जाती हैं। आपके विचार में ऐसा क्यों होता है? शीत ॠतु के अंत में कपड़े की दुकानों में ऊनी वस्त्रों पर भारी छूट दी जाती है। ऐसा क्यों होता है? (पृष्ठ 254)
उत्तर:
साप्ताहिक बाज़ार में देर रात सब्जियाँ सस्ती बिकती हैं क्योंकि विक्रेताओं को खराब होने से पहले अपना स्टॉक जल्दी बेचना होता है, इसलिए वे कीमत कम कर देते हैं। इसी तरह, सर्दियों के अंत में ऊनी कपड़ों पर छूट इसलिए दी जाती है क्योंकि मौसम खत्म होने पर माँग कम हो जाती है और दुकानों को पुराने स्टॉक को खाली करके नए कपड़ों के लिए जगह बनानी होती है।

देर रात सब्जियाँ सस्ती क्यों होती हैं?

  • खराब होने का डर-सब्जियाँ जल्दी खराब हो जाती हैं, इसलिए विक्रेता देर रात तक बचे हुए स्टॉक को बेचना चाहते हैं।
  • कम ग्राहक-देर रात में ग्राहकों की संख्या कम होती है, इसलिए बिक्री बढ़ाने के लिए कीमतें घटानी पड़ती हैं।

सर्दियों के अंत में ऊनी कपड़ों पर छूट क्यों?

  • मौसम का अंत-सर्दियों के खत्म होने पर ऊनी कपड़ों की माँग कम हो जाती है।
  • स्टॉक खाली करना-दुकानदारों को पुराने स्टॉक को खाली करके नए सामान के लिए जगह बनानी होती है।
  • बिक्री बढ़ाना-भारी छूट देकर वे बचे हुए ऊनी कपड़ों को जल्दी बेच पाते हैं।

प्रश्न 3.
आपके विचार में ऑनलाइन और प्रत्यक्ष क्रय के क्या लाभ और हानि हैं? इसका उत्तर विक्रेता और क्रेता दोनों के दृष्टिकोण से पता कीजिए। (पृष्ठ 255)
उत्तर:
ऑनलाइन और प्रत्यक्ष क्रय के लाभ और हानि विक्रेता और क्रेता के दृष्टिकोण से निम्न हो सकते हैं-
क्रेता के दृष्टिकोण से

(i) ऑनलाइन क्रेता द्वारा क्रय के लाभ:

  • सुविधा-घर से खरीददारी की सुविधा।
  • विविधता-उत्पादों की विस्तृत भृंखला और तुलना करने का विकल्प।
  • कीमतें-अक्सर बेहतर डील और छूट उपलब्ध होती है।

(ii) ऑनलाइन क्रय की हानियाँ:

  • उत्पाद की गुणवत्ता-उत्पाद को छूकर या देखकर जाँचने की असमर्थता।
  • वितरण में समय-उत्पाद प्राप्त करने में समय लगता है।
  • सुरक्षा-ऑनलाइन धोखाधड़ी का जोखिम।

(iii) प्रत्यक्ष क्रय के लाभः

  • तत्काल उपलब्धता-उत्पाद तुरंत प्राप्त किया जा सकता है।
  • गुणवत्ता की जाँच-उत्पाद को भौतिक रूप से जाँचने और परखने की सुविधा।
  • व्यक्तिगत संपर्क-विक्रेता से सीधे बातचीत और मोल-भाव की संभावना।

(iv) प्रत्यक्ष क्रय की हानियाँ:

  • समय की खपत-बाज़ार जाने में समय लगता है।
  • सीमित विकल्प-एक ही दुकान पर विकल्पों की संख्या सीमित हो सकती है।
  • आवागमन लागत-यात्रा खर्च और असुविधाएँ।

विक्रेता के दृष्टिकोण से
(i) ऑनलाइन विक्रय के लाभ:

  • व्यापक पहुँच-भौगोलिक सीमाओं के बिना व्यापक ग्राहक आधार तक पहुँच।
  • कम परिचालन लागत-भौतिक दुकान की तुलना में कम किराया और रख-रखाव लागत।
  • आँकड़ों का विश्लेषण-ग्राहक व्यवहार का विश्लेषण करने और विपणन रणनीतियों को बेहतर बनाने की क्षमता।

(ii) ऑनलाइन विक्रय की हानियाँ:

  • प्रतिस्पर्धा-ऑनलाइन बाजार में उच्च प्रतिस्पर्धा।
  • तकनीकी निर्भरता-वेबसाइट या ऐप के प्रबंधन और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • वितरण और वापसी-उत्पादों की पैकिंग, शिरिंग और वापसी का प्रबंधन एक चुनौती है।

(iii) प्रत्यक्ष विक्रय के लाभ

  • व्यक्तिगत संबंध-ग्राहकों से सीधे संबंध बनाना और विश्वास कायम करना।
  • तत्काल बिक्री-उत्पाद की तत्काल बिक्री और नकदी प्रवाह।
  • ब्राण्ड निष्ठा व विश्वास-बेहतर व्यक्तिगत सेवा के माध्यम से ग्राहक निष्ठा बढ़ाना।

(iv) प्रत्यक्ष विक्रय की हानियाँ:

  • सीमित पहुँच-केवल स्थानीय ग्राहकों तक पहुँच।
  • उच्च परिचालन लागत-किराया, बिजली और कर्मचारियों का वेतन जैसी लागतें अधिक होती हैं।
  • समय की पाबंदी-दुकान खोलने और बंद करने का निश्चित समय होता है।

प्रश्न 4.
कुछ सेवाओं के लिए व्यक्तिगत संपर्क की आवश्यकता होती है, जैसे कि कपड़ों की सिलाई, जिसकी संवा ऑनलाइन प्रदान नहीं की जा सकती है। क्या आप ऐसी अन्य सेवाओं का सुझाव दे सकते हैं, जिनके लिए प्रत्यक्ष बाजार की आवश्यकता होती है? (पृष्ठ 255)
उत्तर:
कपड़ों की सिलाई के अलावा, ऐसी कई अन्य सेवाएँ हैं जिनके लिए व्यक्तिगत सम्पर्क की आवश्यकता होती है। इनमें ब्यूटी पार्लर और हेयरड्रेसर, व्यक्तिगत फिटनेस ट्रेनर, मसाज़ थेरेपिस्ट, घरेलू और व्यावसायिक सफाई सेवाएँ और कई तरह के शिल्प और मरम्मत सेवाएँ शामिल हैं। जैसे कि कार मरम्मत, प्लबिंग और इलेक्ट्रीशियन के काम। यहाँ कुछ ऐसी सेवाओं की सूची दी गई है जिनके लिए प्रत्यक्ष बाज़ार या व्यक्तिगत सम्पर्क की आवश्यकता होती है-

  • सौदर्य और व्यक्तिगत देखभाल-ब्यूटी पार्लर, हेयरड्रेसर, मैनीक्योर, पैडीक्योर और मसाज थेरेपिस्ट जैसी सेवाएँ व्यक्तिगत स्पर्श पर बहुत निर्भर करती हैं।
  • स्वास्थ्य और फिटनेस-व्यक्तिगत फिटनेस ट्रेनर, योग प्रशिक्षक और फिजियोथेरेपिस्ट ग्राहकों के साथ सीधे बातचीत करके और उनके शरीर की प्रतिक्रिया को देखकर काम करते हैं।
  • गृह और व्यावसायिक सेवाएँ-घंरेलू और व्यावसायिक सेवाएँ, कीटनाशक नियंत्रण और घरेलू मरम्मत के लिए एक व्यक्ति का मौके पर जाना आवश्यक होता है।
  • मरम्मत और रख-रखाव-कारों की मरम्मत, प्लंबिंग, बिजली का काम और उपकरण की मरम्मत जैसी सेवाएँ भी प्रत्यक्ष शारीरिक हस्तक्षेप की आवश्यकता रखती है।
  • कला और शिल्प-व्यक्तिगत स्पर्श की आवश्यकता वाली कला और शिल्प में मूर्तिकला, पेंटिंग और कस्टम मेड फर्नीचर बनाना शामिल हैं।
  • इवेंट प्लानिंग-शादी, पार्टी या किसी भी अन्य कार्यक्रम की योजना बनाने के लिए इवेंट प्लानर को ग्राहकों के साथ व्यक्तिगत रूप से बैठकर बातचीत करने की आवश्यकता होती है, ताकि वे उनकी जरूरतों और इच्छाओं को समझ सकें।
  • कस्टम और व्यक्तिगत सेवाएँ-कस्टम-मेड कपड़े सिलवाने की तरह, कुछ और सेवाएँ भी व्यक्तिगत मापन और विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार काम करने पर निर्भर करती हैं, जैसे कि चमड़े का सामान जूते या ज्वैलरी बनवाना।

प्रश्न 5.
हमने बाजारों के अलग-अलग आयामों पर चर्चा की। क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि हमारा जीवन बाजारों के बिना कैसा होगा? यदि किसान चावल, गेहूँ, दाल, सब्जियाँ और फल बाजार में न लाएँ तो क्या होगा? अगर सूरत में वस्त्र बनाने वाले उत्पादक बाजार से कपास जैसी आवश्यक सामग्री न खरीद पाएँ तो क्या होगा? (पृष्ठ 263)
उत्तर:
बाज़ारों के बिना लोगों को स्वयं-उत्पादन या वस्तु-विनिमय पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे विविध वस्तुओं और सेवाओं तक पहुँच सीमित हो जाएगी। जीवन चुनौतीपृर्ण होगा. आर्थिक और सामाजिक संपर्क कम हो जाएँगे।
अगर किसान चावल, गेहूँ, दाल या सब्जियाँ नहीं लाते हैं, तो-

  • खाद्य पदार्थों की माँग और कीमतें बढ़ेगी।
  • परिवारों को बुनियादी जरूरतें पूरी करने में संघर्ष करना पड़ेगा, जिससे दैनिक जीवन बाधित होगा।

अगर सूरत के कपड़ा बाज़ार में कपास की कमी होती है, तो-

  • कपड़े और वस्त्रों का उत्पादन रुक जाएगा, जिससे थोक व खुदरा विक्रेताओं और निर्यात संबंधी व्यवस्था प्रभावित होंगे।
  • कारीगर और श्रमिक अपनी आजीविका खो देंगे।
    अतः बाज़ार उत्पादकों और उपभोक्ताओं को जोड़ने में माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 6.
शासकों द्वारा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना आधुनिक भारत की प्रथा नहीं है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में घी का व्यापार करने वाले व्यापारियों के लिए निर्देश सम्मिलित हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि विक्रेता घी की मात्रा की कमी, जो मापने वाले डिब्बे में चिपकी रह जाती है, की क्षति-पूर्ति हेतु क्रेताओं को $1 / 50$ वाँ भाग अधिक मानस्त्राव के रूप में देगा। (पृष्ठ 266)
उत्तर:
प्रश्नानुसार भारत में ऐतिहासिक उपभोक्ता संरक्षण प्रथाओं पर चर्चा की गई है तथा विशेष रूप से कौटिल्य के अर्थशास्त्र का संदर्भ दिया गया है।

  • ऐतिहासिक संदर्भ-शासकों द्वारा उपभोक्ता हितों की रक्षा करना भारत में कोई आधुनिक प्रथा नहीं है।
  • कौटिल्य का अर्थशास्त्र-इस प्राचीन ग्रंथ में घी का व्यापार करने वाले व्यापारियों के लिए विशिष्ट निर्देश शामिल हैं।
  • क्षतिपूर्ति नियम-इसमें कहा गया है कि विक्रेता को मापक पात्र पर चिपकने वाली मात्रा की क्षतिपूर्ति के लिए क्रेता को घी का 1/50 वाँ भाग अतिरिक्त देना होगा।

प्रश्न 7.
वे कौन-से अन्य क्षेत्र हैं, जहाँ आप सरकार को बाजार के कार्यकलापों में भाग लेते हुए देखते हैं? ( पृष्ठ 267)
उत्तर:
सरकार निष्पक्षता, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए बाज़ार के कई क्षेत्रों में शामिल है, कुछ प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं-

  • मूल्य नियंत्रण-सब्सिडी या समर्थन मूल्य के माध्यम से दवाएँ, एल.पी.जी. और खाद्यान्न जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें निर्धारित करती हैं।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली ( पीडीएस )राशन की दुकानों के माध्यम से गरीब परिवारों को कम लागत पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती है।
  • कराधान और विनियमन-धोखाधड़ी, कालाबाज़ारी या जमाखोरी को रोकने के लिए जी.एस.टी. आयकर लगाती है और बाज़ार प्रथाओं की निगरानी करती है।
  • बुनियादी ढाँचे का विकास-व्यापार और किसानों का समर्थन करने के लिए सड़कें, परिवहन प्रणाली, कोल्ड स्टोरेज और बाज़ार बनाती है।
  • उपभोक्ता संरक्षण-उत्पाद की गुणवत्ता, उचित मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने और उपभोक्ता अदालतों के माध्यम से विवादों को सुलझाने के लिए कानूनों को लागू करती है।
  • किसानों और छोटे व्यवसायों के लिए समर्थन-विकास और बाज़ार तक पहुँच के लिए एम.एस.पी. ॠण और योजनाएँ प्रदान करती है।
  • आयात और निर्यात की निगरानी-स्थानीय उत्पादकों की सुरक्षा और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को विनियमित करती है। सरकार की भूमिका यह सुनिश्चित करती है कि बाज़ार सुचारु रूप से, निष्पक्ष रूप से कार्य करे और समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुँचाए।

प्रश्न 8.
क्या ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहाँ सरकार को हस्तक्षेप कम करने की आवश्यकता है? परिवार या संबंधियों से चर्चा कीजिए। ( पृष्ठ 267)
उत्तर:
कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ सरकारी हस्तक्षेप कम करने की आवश्यकता हो सकती है। खासकर व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों में, लेकिन यह एक जटिल मुद्दा है जिसके पक्ष और विपक्ष दोनों में तर्क है। जहाँ सरकारी हस्तक्षेप को कम करने की बात है, वहाँ आर्थिक और सामाजिक नीतियाँ शामिल हो सकती हैं। परिवार और संबंधियों के बीच इस विषय पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि कुछ मामलों में, जैसे कि बाल संरक्षण या घरेलू हिंसा से बचाव में सरकारी हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है।

सरकारी हस्तक्षेप को कम किए जाने योग्य कुछ क्षेत्र

  • निजी और पारिवारिक मामले-विवाह और तलाक जैसे पारिवारिक कानून राज्य द्वारा नियंत्रित होते हैं, जो इसे हस्तक्षेप का क्षेत्र बनाते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार को अधिक स्वायत्तता होनी चाहिए।
  • आर्थिक हस्तक्षेप-कुछ उद्योगों में नियम या सब्सिडी, अर्थव्यवस्था को विकृत कर सकता है। ऐसे क्षेत्रों में न्यूनतम राज्य हस्तक्षेप का समर्थन किया जा सकता है।
  • सामाजिक सुरक्षा और सहायता-सरकारी योजनाएँ और सहायता गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। उनके कार्यान्वयन में खामियाँ हो सकती हैं, जिससे अक्षमता आ सकती है। इस पर चर्चा की जा सकती है कि क्या इन योजनाओं को समुदाय आधारित या व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर अधिक केंद्रित किया जा सकता है।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य-कभी-कभी सरकारें अपनी नीतियों में अपने राजनीतिक एजंड़ो को शामिल कर देती हैं। जिसमें यह चर्चा खड़ी हो जाती है कि संबंधित कार्यक्रम बच्चों या नागरिकों के भविष्य को किस हद तक प्रभावित कर सकता है।
  • कानूनी और न्याय प्रणाली-न्यायपालिका लोगों के अधिकारों की रक्षा करती है, लेकिन कभी-कभी सरकारें जजों की नियुक्ति व कानूनों में बदलाव के माध्यम से इसमें दखल देने वाली हो सकती है। अतः यहाँ पर सरकार के हस्तक्षेप को न्यूनतम किया जा सकता है।

परिवार और संबंधियों से चर्चा के बाद इस निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि सरकारी हस्तक्षेप एक जटिल मुद्दा है जिसके पक्ष
और विपक्ष से तर्क हो सकते हैं। परिवार या संबंधियों के साथ इन मुद्दों पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है, ताकि सभी के विचार सुने जा सके और एक संतुलित दृष्टिकोण विकसित हो सके।

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ सरकारी हस्तक्षेप कभी-कभी विकास को धीमा, दक्षता को कम और होड़ को कम कर सकता है। निष्पक्षता और सुरक्षा के लिए भागीदारी आवश्यक है। विनियमित क्षेत्रों में हस्तक्षेप कम करने से बाज़ार की स्वतंत्रता, नवाचार और दक्षता को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ होगा।

प्रश्न 9.
आपके और आपके पड़ोस में अगली गली के बच्चों की टोली के मध्य कंचे खेलने की प्रतियोंगिता है। आप प्रतियोंगिता के लिए नए कंचे खरीदना चाहतं हैं। आपनं ₹ 150 बचा रखं हैं। आप कंचे खरीदने हंतु दुकान जाते हैं। आप कंचों में कौन-से गुणों को देखेंगे ताकि आप प्रतियोगिता जीत सकें? (पृष्ठ 267)
उत्तर:
कंचों की प्रतियोगिता जीतने के लिए, में कंचों में निम्नलिखित गुण देखूँगा-

  • वजन और संतुलन-थोड़ा भारी कंचा बिना उछले दूसरों को अधिक प्रभावी ढँग से मार सकता है।
  • चिकनी सतह-लगातार लुढ़कना और बेहतर नियंत्रण सुनिश्चित करती है।
  • गोलाई-पूरी तरह गोल कंचे अधिक अनुमानित रूप से लुढ़कतें हैं।
  • आकार-थोड़ा बड़ा शूटर कंचा (जिसे ‘टो’ भी कहा जाता है) बेहतर सटीकता और शक्ति दे सकता है।
  • टिकाऊपन-मजबूत कंचे खेल के दौरान आसानी से टूटते या चटकते नहीं हैं।
  • पकड़ या बनावट-फिसलने के बिना शाट्स को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सतही पकड़ और कीमत सही होनी चाहिए।

बाजारों की समझ Class 7 Question Answer in Hindi

Class 7 Samajik Vigyan Chapter 12 Question Answer

प्रश्न 1.
बाजार की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? हाल में जब आप बाजार गए थे, तब आपने वहाँ कौन-कौन सी विशेषताएँ देखीं?
उत्तर:
बाज़ार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • भौगोलिक क्षेत्र-बाज़ार किसी विशेष स्थान या भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित हो सकता है या यह एक अमूर्त अवधारणा भी हो सकती है जहाँ खरीददार और विक्रेता संपर्क में आते हैं।
  • क्रेता और विक्रेता-बाज़ार के अस्तित्व के लिए खरीददारों और विक्रेताओं का होना आवश्यक है।
  • वस्तु या सेवा-खरीद-बिक्री के लिए एक विशिष्ट उत्पाद, वस्तु या सेवा उपलब्ध होनी चाहिए।
  • मूल्य-वस्तुओं और सेवाओं का आंदानप्रदान एक निश्चित मूल्य पर होता है, जिसमें मोल-भाव और लेन-देन की व्यवस्था शामिल होती है।

हाल ही में बाज़ार जाने पर, वहाँ कई दुकानें, विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे सब्जियाँ, कपड़े और घरेलू सामान था। हर सामान का एक मूल्य था, जो उस दिन या कम्पनी की माँग और आपूर्ति के आधार पर तय हुआ था। मैंने पाया कि यह व्यक्तियों के आदान-प्रदान के स्थान भी है, जहाँ लोग केवल खरीददारी ही नहीं, बल्कि सामाजिक बातचीत भी करते हैं बाज़ार में पहुँचने के लिए अच्छी सड़क और परिवहन की सुविधा थी, जिससे लोगों के लिए वहाँ पहुँचना आसान था।

प्रश्न 2.
इस अध्याय के आरंभ में दिए गए एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री के उद्धरण को देखिए। इस अध्याय के संदर्भ में उस उद्धरण की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
“बाज़ार से समृद्धि तभी उत्पन्न होती है, जब व्यक्तियों को उन वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है, जिन्हें वे स्वयं निर्मित नहीं कर सकते हैं।”

एडम स्मिथ अर्थशास्त्री
यह श्रम विभाजन के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ लांग अपनी विशेषता के अनुसार वस्तुओं और संवाओं का उत्पादन करते हैं और फिर उन्हें उन चीज़ों के लिए बाज़ार में बदलते हैं जिनकी उन्हें आवश्यकता होती है लेकिन वे स्वयं उनका उत्पादन नहीं करते। इस प्रक्रिया से समृद्धि आती है क्योंकि यह कुशल उत्पादन को बढ़ावा देती है और वस्तुओं व सेवाओं के आदान-प्रदान को संभव बनाती है।

  • श्रम विभाजन-जब व्यक्ति किसी विशेष वस्तु या सेवा के उत्पादन में माहिर हो जाते हैं, तो वे उसे दूसरों की तुलना में अधिक कुशलता से बना सकते हैं।
  • विशेषज्ञता-कपड़ों के विशेषज्ञ ब्रेड नहीं बना सकते और ब्रेड बनाने वाले कपड़ों का उत्पादन नहीं कर सकते।
  • आदान-प्रदान-वे एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं और एक-दूसरे के साथ अपनी वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे एक सम्पन्न बाज़ार बनता है।

प्रश्न 3.
अमरूद के क्रय-विक्रय के दिए गए उदाहरण में यदि विक्रेता को अच्छा मूल्य मिल रहा है, तब वह किसानों से और अधिक अमरूद क्रय करने का प्रयास करेगा, ताकि वह उन्हें उसी मूल्य पर बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा सके। ऐसी स्थिति में किसान क्या करेगा? क्या आपको लगता है कि वह अगली ऋतु में अमरूदों की माँग के बारे में सोचना शुरू करेगा? उसकी संभावित प्रतिक्रिया क्या होगी?
उत्तर:
इस स्थिति में किसान यह देखेगा कि विक्रेता अमरूद् को लाभदायक कीमत पर अधिक खरीद रहे हैं। यह बाज़ार में अमरूद की मज़बूत माँग का संकेत देता है। परिणामस्वरूप, किसान इस प्रवृत्ति पर विचार करने और उनके द्वारा अगले सीजन के लिए तदनुसार योजना बनाने की संभावना है। हाँ, किसान निश्चित रूप से आने वाले सीजन में अमरूद् की माँग के बारे में सोचना शुरू कर देगा। यह देखकर कि अमरूद अच्छी तरह से बिक रहे हैं, उसे माँग का लाभ उठाने और अधिक लाभ कमाने के लिए अमरूद उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

किसान की संभावित प्रतिक्रिया अमरूद उगाने के लिए अधिक संसाधन जैसे-भूमि, समय और श्रम आवंटित करना होगा। वह उत्पादन बढ़ाने और भविष्य में अच्छी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बेहतर कृषि तकनीकों या इनपुट में भी निवेश कर सकता है, यह उम्मीद करते हुए कि माँग और कीमतें अनुकूल रहेंगी।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रकार के बाज़ारों का उनकी विशेषताओं से मिलान कीजिए-
Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ 7
उत्तर:
Class 7 SST Chapter 12 Question Answer in Hindi बाजारों की समझ 6

प्रश्न 5.
सामान्यतया मूल्य क्रेताओं की माँग और विक्रेताओं की आपूर्ति की अंत:क्रिया द्वारा निर्धारित होता है। क्या आप ऐसे उत्पादों के बारे में सोच सकते हैं, जहाँ किसी उत्पाद की माँग के लिए क्रेताओं की संख्या कम होने के बावजूद उसका मूल्य अधिक होता है? इसके क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, ऐसी कई वस्तुएँ हैं जिनकी कीमतें कम माँग होने के बावजूद अधिक होती हैं। जैसे कि दुर्लभ वस्तुएँ, अत्यधिक विशिष्ट वस्तुएँ और उच्च गुणवत्ता वाले लक्जरी उत्पाद। इनमें लक्जरी गाड़ियाँ, डिज़ाइनर कपड़े और स्पोर्टस कार जैसे महँगे उत्पाद होते हैं, भले ही बहुत कम लोग उन्हें खरीदते हों।

कारण

  • सीमित आपूर्तिः कुछ उत्पादों की आपूर्ति स्वाभाविक रूप से सीमित होती हैं जैसे कि कलाकृतियाँ या दुलंभ खनिज। इन वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाया नहीं जा सकता है. इसलिए इनकी सीमित आपूर्ति के कारण कीमतें अधिक होती हैं, भले ही माँग कम हो।
  • उच्च उत्पादन लागतः कुछ वस्तुओं के उत्पादन में बहुत ज्यादा लागत आती है। ऐसी स्थिति में विक्रेता अपने मुनाफ़े को बनाए रखने के लिए अधिक कीमतें वसूलते हैं, भले ही बाज़ार में उनकी माँग कम हो।
  • उच्च गुणवत्ता और विशिष्टता-लक्ज़री ब्रांड या विशिष्ट विशेषज्ञता वाले उत्पादों की माँग कम हो सकती है, लेकिन उनकी उच्च गुणवत्ता और विशिष्टता के कारण उनकी कीमतें अधिक होती हैं।
  • नियंत्रित बाज़ार-कुछ मामलों में, सरकार द्वारा कीमतों को नियंत्रित किया जाता है, जिससे माँग कम होने पर भी कीमतें अधिक रह सकती है।

प्रश्न 6.
सब्जियों के एक खुदरा विक्रेता की वास्तविक जीवन-स्थिति पर विचार कीजिए-एक परिवार सब्जियाँ खरीदने के लिए दुकान पर आया। विक्रेता, जो फलियाँ ठेले पर बेच रहा था, उसकी कीमत ₹30/- प्रति किलोग्राम थी। महिला ने कीमत को ₹25/- प्रति किलोग्राम के नीचे लाने के लिए विक्रेता के साथ मोल-भाव करना शुरू कर दिया। विक्रेता ने उस मूल्य पर विक्रय करने से मना कर दिया और कहा कि उसे उस मूल्य पर घाटा होगा। महिला वहाँ से चली गई। फिर परिवार समीप के सुपरमार्केट में गया और वहाँ से सब्जियाँ क्रय कीं। सुपरमार्केट में अच्छे ढंग से पैक की गई फलियों के लिए उन्होंने ₹ 40/- प्रति किलोग्राम का भुगतान किया। क्या कारण है कि परिवार ने ऐसा किया? क्या कीमतों के अतिरिक्त ऐसे कोई कारक हैं, जो क्रय-विक्रय को प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
यह स्थिति दर्शाती है कि सब्जी विक्रेता और सुपर मार्केट में सख्जियों की कीमतों में अंतर हो सकता है, जो कई कारकों पर निभरं करता है, जैसे कि परिचालन लागत, ब्राडिंग, पैकिंग और आपूर्ति श्रंखला। विक्रेता को ₹30 /- किलो के भाव पर नुकसान हो रहा था, जो संभवतः उनकी अपनी लागत और लाभ मार्जिन को दर्शाता है, जबकि सुपरमार्केट ने ₹ 40 /-किलों पर बेचा क्योंकि उनके पास पैकिंग, भण्डारण और वितरण जैसी अतिरिक्त लागतें थीं।

कीमतों के अंतर के कारण:

  • लागत और लाभ-विक्रेता का अपनी लागत और लाभ मार्जिन होता है, जो सुपरमार्केट से अलग होता है।
  • परिचालन लागत-सुपरमार्केट में पैकिंग, भंडारण और वितरण के लिए अधिक लागत होती है, जिसका भार वे ग्राहकों पर डालते हैं।
  • आपूर्ति शृंखला—विक्रेता थोक विक्रेताओं से सीधे सब्जियाँ खरीदते हैं, जबकि सुपरमार्केट की एक लंबी आपूर्ति भृंखला होती है।
  • ब्रांडिंग और गुणवत्ता-सुपरमार्केट में पैक की गई सब्जियाँ अक्सर उच्च गुणवत्ता और ब्रांडिंग के कारण महँगी होती है।

निष्कर्ष:

  • कीमतें आपूर्ति और माँग, लागत, प्रतिस्पर्धा और बाज़ार की स्थिति जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर भिन्न होती है।
  • महिला ने एक बेहतर सौदा पाने के लिए मोल-भाव करने की कोशिश की, जो कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
  • अंत में, उन्होंने सुपरमार्केट में उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियाँ खरीदी और अच्छी पैकिंग के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार हुई।

प्रश्न 7.
भारत के कुछ जिले टमाटर उगाने के लिए प्रसिद्ध हैं। हालाँकि, कुछ मौसमों में किसानों के लिए स्थिति अच्छी नहीं होती। अधिक उपज होने पर कृषकों द्वारा अपनी उपज कां फेंकनं और उनका सारा श्रम नष्ट होने के समाचार आते हैं। आपके विचार में किसान ऐसा क्यों करते हैं? ऐसी स्थिति में थोक विक्रेता क्या भूमिका निभा सकते हैं? यह सुनिश्चित करने के संभावित उपाय क्या हो सकते हैं जिससे टमाटर बर्बाद न हों और किसानों को नुकसान भी न पहुँचे?
उत्तर:
किसान बड़ी मात्रा में फसल उत्पादन होने पर अपनी उपज फेंक देते हैं। क्योंकि बाज़ार में अतिरिक्त आपूर्ति होने पर कीमतें बहुत गिर जाती हैं और उपज को स्टोर करने या परिवहन करने की लागत बेहतर मूल्य से अधिक हो जाती है। थोक व्यापारी इस स्थिति में कीमतों को स्थिर रखने में भूमिका निभा सकते हैं और भविष्य में बर्बादी रोकने और किसानों को सुरक्षित करने के लिए फसल प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करना, भंडारण सुविधाएँ बनाना और फसल बीमा जैसी योजनाएँ लागू करना महत्वपूर्ण है।

किसान उपज क्यों फेकते हैं?

  • बाज़ार में अतिरिक्त आपूर्ति-जब बहुत सारे किसान एक ही समय में टमाटर उगाते हैं, तो बाज़ार में टमाटर की भारी मात्रा में आपूर्ति हो जाती है, जिससे कीमतें बहुत गिर जाती हैं।
  • परिवहन और भंडारण लागत-यदि उपज का मूल्य बहुत कम हो जाता है, जो उसे बाज़ार तक ले जाने या उसका भंडारण करने की लागत किसानों के लिए और भी अधिक नुकसानदेह हो सकती है।
  • खराब होने की दर अधिक-टमाटर एक जल्दी खराब होने वाली वस्तु है। जब कीमतें इतनी कम होती हैं कि लागत भी वसूल नहीं हो पाती, तो किसानों के लिए इसे फेंक देना ही एकमात्र विकल्प बचता है।

थोक व्यापारी क्या भूमिका निभा सकते हैं?

  • थोक में खरीद-थोक व्यापारी किसानों से सीधे थोक में टमाटर खरीदकर मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं।
  • मूल्य श्रृंखला में सुधार-थांक व्यापारी कोल्ड स्टोरंज में निवंश कर सकते हैं, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है।
  • बाज़ारों के बीच समन्वय-थोक व्यापारी विभिन्न बाज़ारों की माँग और आपूर्ति के आधार पर टमाटरों की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे एक जगह मूल्य बहुत कम न हो।

टमाटर को बर्बाद होने से कैसे रोकें और किसानों को नुकसान से कैसे बचाएँ?

  • कोल्ड स्टोरेज़-किसानों और सरकारों को कोल्ड स्टोरेज की सुविधा बढ़ानी चाहिए, जिससे फसल को जरूरत पड़ने तक स्टोर किया जा सके।
  • मूल्य-वर्धित उत्पाद-टमाटर को सॉस, पेस्ट, पाउडर या केचप जैसे मूल्य वर्धित उत्पादों में संसाधित करने के लिए प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जा सकती है।
  • निर्यात और विपणन-टमाटर को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में निर्यात करने और विपणन की सुविधाओं का विस्तार करने की आवश्यकता है।
  • सरकारी सहायता-सरकार को एम.एस. पी. (न्यूनतम समर्थन मूल्य) जैसी नीतियाँ लागू करनी चाहिए या आपदा प्रबंधन योजना के तहत किसानों को सहायता प्रदान करनी चाहिए।
  • अनुबंध कृषि-किसान और खरीददार के बीच अनुबंध खेती को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे फसल का एक निश्चित मूल्य सुनिश्चित हो सके।

प्रश्न 8.
क्या आपने अपने या किसी अन्य विद्यालय द्वारा आयोजित किसी मेले के बारें में सुना हैं या उसमें गए हैं? अपने मित्रों और शिक्षकों से ऐसे मेलों के बारे में चर्चा कीजिए कि इन मेलों में किस तरह से क्रय-विक्रय और मोल-भाव होता है?
उत्तर:
हाँ, कई स्कूलों में मेले आयोजित होते हैं, जहाँ छात्र विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हैं। यहाँ कुछ सामान्य गतिविधियाँ, बिक्री और बातचीत होती हैं, जिसमें गेम और क्विज, नृत्य, गायन, नाटक या संगीत वाद्य यंत्र, कलाकृतियाँ, हस्त-शिल्प, खाद्य स्टॉल, फेस पेटिंग और मैजिक शो आदि का आयोजन इन मेलों में किया जाता है।
इन मेलों में क्रय-विक्रय और मोल-भाव का तरीका:

  • उत्साहपूर्ण और मैत्रीपूर्ण-छात्र खरीदारों को आकर्षित करने के लिए उत्साहपूर्ण और मैत्रीपूर्ण तरीके से बिक्री करते हैं।
  • स्पष्ट और आकर्षक-वे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपने उत्पादों और सेवाओं के बारे में स्पष्ट और आकर्षक तरीके से बताते हैं।
  • मोल-भाव करना-खरीददार और छात्र अक्सर कीमतों पर मोल-भाव भी करते हैं।
  • ग्राहक सेवा-वे ग्राहकों के सवालों के जवाब देते हैं और उन्हें खरीददारी का अच्छा अनुभव प्रदान करने की कोशिश करते हैं।
  • विद्यालय द्वारा आयोजित मेले एक उत्साहपूर्ण और जीवंत आयोजन है, जो छात्रों को अपनी रचनात्मकता, सामाजिक कौशल और व्यावसायिक कौशल को प्रदर्शित करने का अवसर देता है। यह छात्रों और उनके परिवारों को एक साथ लाने और मनोरंजन का एक शानदार तरीका भी है।

प्रश्न 9.
कोई भी पाँच उत्पाद चुनें और अध्याय में चर्चा किए गए प्रमाणन चिह्नों के साथ उनके लेबल की जाँच करें। क्या आपको ऐसे उत्पाद मिले, जिन पर मानक चिह्न नहीं था? यह किस बात का सूचक है?
उत्तर:
पाँच उत्पाद और उनके प्रमाणन चिह्न-

  • दूध पैक – एफ.एस.एस.ए.आई. मार्क
  • प्रेशर कुकर – आई.एस.आई. मार्क
  • चावल का थैला – एगमार्क
  • एल.ई.डी. बल्ब – बी.ई.ई स्टार रेटिंग
  • चिप्स का पैकेट-एफ.एस.एस.ए.आई. मार्क

किंतु, कुछ उत्पाद ऐसे भी मिलेंगे, जो प्रमाणन चिह्न के बिना हो सकते हैं।
(i) कपड़े -कुछ कपड़ों पर कोई प्रमाणन चिह्न नहीं हो सकता है। खासकर जब वे स्थानीय निर्माताओं द्वारा बनाए जाते हैं और माकों का पालन नहीं करते हैं।
(ii) प्लास्टिक के बर्तन-इन बर्तनों पर भी प्रमाणन चिह्न नहीं होता है।
(iii) फल और सब्जियाँ-फल और सब्जियाँ जिन पर एगमार्क लोगो नहीं होता है, वे प्रमाणित नहीं होते हैं।
(iv) इलेक्टूक उपकरण-कुछ इलेक्ट्रिक उपकरणों पर भी प्रमाणन चिह्न नहीं हो सकता है, क्योंकि सभी के लिए प्रमाणन अनिवार्य नहीं हैं।
(v) चमड़े का सामान-चमड़े के उत्पादों पर प्रमाणन चिह्न अनिवार्य नहीं हैं।

  • प्रमाणन चिह्न क्यों नहीं होते हैं?
  • कुछ उत्पादों के लिए प्रमाणन अनिवार्य नहीं है, इसलिए उन्हें प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होती है।
  • प्रमाणन प्रक्रिया महँगी हो सकती है, इसलिए कुछ निर्माता प्रमाणन नहीं कराते हैं।
  • कुछ देशों में प्रमाणन की कानूनी बाध्यता न होने के कारण प्रमाणन चिह्न नहीं होता है।

प्रश्न 10.
आपने और आपके सहपाठियों ने एक साबुन बनाया है। इसकी पैकेजिंग के लिए एक लेबल डिजाइन कीजिए। आपके विचार से लेबल पर क्या लिखा होना चाहिए, ताकि उपभोक्ता उत्पाद को बेहतर तरीके से जाँच सकें?
उत्तर:
यहाँ साबुन की टिकिया को लेबल किया गया है, जिसमें सम्मिलित किए जाने वाले महत्वपूर्ण अवयव हैं-

  • ब्रांड का नाम-साबुन के लिए एक प्रतिष्ठित और नया नाम रखना।
  • सूची सामग्री-उपयोग की गई सामग्री जैसे-नारियल का तेल, ग्लिसरीन, एलोवेरा आवश्यक अन्य साम्रगी का उल्लेख।
  • शुद्ध वज़न-साबुन की टिकिया का वज़न।
  • निर्माण तिथि और समाप्ति तिथि-सुरक्षा और जागरूकता के लिए आवश्यक।
  • एम.आर.पी.-अधिकतम खुदरा मूल्य (सभी करों सहित) अंकित करना।
  • निर्माता का नाम और पता-ग्राहक संवा और जवाबदेही के लिए आवश्यक।
  • प्रमाणन-जैसे आई.एस.आई. या एफ.एस.एस. ए.आई., जो भी जरूरी हो हर्बल या जैविक उत्पादों के लिए अलग-अलग लेबल लगाना।
  • उपयोग के निर्देश-साबुन का उपयोग कैसे करें या किस प्रकार की त्वचा के लिए उपयुक्तता।

कुछ उत्पादों (जैसे हस्तनिर्मित वस्तुएँ या खुले सामान) पर लेबल नहीं हो सकते हैं. क्योंकि वे बड़े उद्योगों द्वारा पैक या निर्मित नहीं होते हैं। वे स्थानीय स्तर पर बनाए जाते हैं, एक मानकीकरण प्राधिकरण द्वारा परीक्षण नहीं किए जाते हैं। वे अनब्रांडेंड या अनौपचारिक क्षेत्र के उत्पाद हैं।

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