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Shabd Vichar in Sanskrit Class 7
संस्कृत शब्द विचार कक्षा 7
वर्णों से शब्द और शब्दों से वाक्य बनता है, वाक्य में प्रयोग होने वाले शब्दों को पद कहा जाता है । प्रत्येक शब्दों के मूल रूप को प्रातिपदिक कहा जाता है; जैसे— बालकः, रामः ।
‘बालकः पठति’ वाक्य में बालकः पद है। एक वाक्य में अनेक पद हो सकते हैं।
शब्द के भेद
शब्द के दो भेद होते हैं
1. विकारी शब्द संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया पद विकारी शब्द होते हैं, क्योंकि वाक्य निर्माण करते समय इनमें परिवर्तन आ जाता है अर्थात् जिन शब्दों का स्वरूप वाक्य प्रयोग करते समय बदल जाता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं।
जैसे –
- संज्ञापद – रामः, सीता, पुस्तकम् आदि ।
- सर्वनामपद तत् इदम् यत् आदि ।
- विशेषणपद सुंदर, लघु, द्वि, एक आदि ।
- क्रियापद गच्छति, अगच्छत, गच्छतु आदि ।
पदान्त के आधार पर विकारी शब्द के दो भेद हैं
- सुबन्त इनमें संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्द आते हैं अर्थात् संज्ञा, सर्वनाम व विशेषण पद सुबन्त कहलाते हैं। इनमें सुप् प्रत्यय जुड़ता है। इनकी संख्या 21 है।
- तिङन्त क्रियापद अर्थात् धातुओं के साथ जुड़ने वाले (ति, तः, अन्तिं इत्यादि) तिङन्त कहलाते हैं। इनकी संख्या 18 है।
2. अविकारी शब्द ऐसे शब्द जिनमें लिङ्ग, पुरुष, वचन, काल आदि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है, अविकारी शब्द कहे जाते हैं। इन्हें अव्यय या निपात शब्द भी कहा जाता है।
जैसे – कुत्र, अद्य, अधुना, यत्र, तत्र, कदा, च, न।
इसके चार भेद हैं-
- क्रियाविशेषण – शनै, तीव्रं
- समुच्चयबोधक-वा, च
- संकेत बोधक-अत्र-तत्र, यदा-कदा
- विस्मयबोधक – भो, हे, अरे
विकार जनक तत्त्व
वाक्य प्रयोग में पदों में आने वाला परिवर्तन जिन तत्त्वों पर निर्भर करता है, उन्हें विकार जनक तत्त्व कहते हैं। ये तत्त्व निम्नलिखित हैं:
1. लिङ्ग संस्कृत में लिङ्ग तीन प्रकार के होते हैं
- पुल्लिङ्ग जिस शब्द के प्रयोग से पुरुष जाति का बोध हो, वह पुल्लिङ्ग कहलाता है; जैसे – बालकः, देवः, खगः, अरुणः आदि ।
- स्त्रीलिङ्ग जिस शब्द के प्रयोग से स्त्री जाति का बोध हो, वह स्त्रीलिङ्ग कहलाता है; जैसे- बालिका, नदी, लता, चटका, रमा आदि।
- नपुंसकलिङ्ग जिन शब्दों से न पुरुष जाति और न स्त्री जाति का बोध हो, वह नपुंसकलिङ्ग कहलाता है; जैसे- पुष्पम्, दानम्, पुस्तकम्, फलम् आदि।
2. वचन संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण के जिस रूप से हमें संख्या का ज्ञान हो, उसे वचन कहते हैं। संस्कृत में वचन तीन प्रकार के होते हैं
- एकवचन जो शब्द एक वस्तु अथवा व्यक्ति का बोध कराता है, एकवचन कहलाता है; जैसे- रामः, बालकः, लता, फलम् आदि ।
- द्विवचन जो शब्द दो व्यक्तियों अथवा वस्तुओं का बोध कराता है, द्विवचन कहलाता है; जैसे- रामौ, बालकौ, लते, फले आदि।
- बहुवचन जो शब्द तीन या तीन से अधिक व्यक्तियों अथवा वस्तुओं का बोध कराता है, बहुवचन कहलाता है; जैसे- रामाः, बालकाः, लता, फलानि आदि ।
नोट संज्ञापद, सर्वनामपद तथा विशेषण पदों के अतिरिक्त क्रिया पदों में भी तीन वचनों का प्रयोग होता है; जैसे- पठति, पठतः, पठन्ति आदि।
3. पुरुषः वाक्य प्रयोग करते समय पदों में आने वाला परिवर्तन पुरुषानुसार भी होता है। संस्कृत में पुरुष तीन प्रकार के होते हैं
(i) प्रथम पुरुष:
(iii) उत्तम पुरुषः
(ii) मध्यम पुरुषः
(i) प्रथम पुरुष जिस व्यक्ति विशेष के बारे में बात कही जाती है वह ‘प्रथम पुरुष’ कहलाता है । संस्कृत भाषा में प्रथम पुरुष के तीनों लिङ्गों में भिन्न रूप होते हैं; जैसे-
- लिङ्ग – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन
- पुल्लिङ्ग – सः (वह) – तौ (वे दोनों) – ते (वे सब)
- स्त्रीलिङ्ग – सा (वह) – ते (वे दोनों) – ताः (वे सब)
- नपुंसकलिङ्ग – तत् (वह) – ते (वे दोनों) – तानि (वे सब)
सर्वनाम के स्थान पर जातिवाचक अथवा व्यक्तिवाचक संज्ञा का प्रयोग भी प्रथम पुरुष में किया जाता है; जैसे-
- लिङ्ग – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन
- पुल्लिङ्ग – बालकः – बालकौ – बालकाः
- स्त्रीलिङ्ग – बालिका – बालिके – बालिका:
- नपुंसकलिङ्ग – पुस्तकम् – पुस्तके – पुस्तकानि
(ii) मध्यम पुरुष जिस व्यक्ति विशेष से सीधी वार्ता होती है अर्थात् बात करते समय जो वक्ता के सामने रहकर अपने विषय में बातें सुनता है, वह ‘मध्यम पुरुष’ कहलाता है। ये तीनों लिङ्गों में समान होते हैं; जैसे-
- लिङ्ग – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन
- पुल्लिङ्ग/स्त्रीलिङ्ग – त्वम् – युवाम् – यूयम्
- नपुंसकलिङ्ग – (तू/तुम) – (तुम दोनों) – (तुम सब)
(iii) उत्तम पुरुष जिस शब्द को व्यक्ति या वक्ता स्वयं के लिए प्रयोग करता है, वह ‘उत्तम पुरुष’ कहलाता है। ये शब्द तीनों लिङ्गों में समान होते हैं; जैसे-
- लिङ्ग – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन
- पुल्लिङ्ग/ स्त्रीलिङ्ग/ नपुंसकलिङ्ग – अहम् (मैं) – आवाम् (हम दोनों) – वयम् (हम सब)
4. लकार पदों में आने वाला परिवर्तन लकार पर है। संस्कृत में काल (लकार) तीन होते हैं, भी निर्भर करता
- वर्तमानकाल: – बालकाः धावन्ति। (बालक दौड़ते हैं ।)
- भूतकालः – बालकाः अधावन्। (बालक दौड़े।)
- भविष्यकालः – बालकाः धाविष्यन्ति । (बालक दौड़ेंगे।)
- आज्ञार्थक – बालकाः पठन्तु। (बालक बढ़ें।)
- इच्छर्थकः – बालकः क्रीडेत्। (बालक को खेलना चाहिए।)
5. कारकः संज्ञा अथवा सर्वनाम का रूप वाक्य में कारक के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
वाक्य में क्रियापद की सहायता के लिए अन्य पद होते हैं, उन्हें कारक कहते हैं। संस्कृत में कारकों की संख्या छः है। किसी भी वाक्य में इन तत्त्वों में से कुछ तत्त्व अवश्य शामिल होते हैं; जैसे—
- कर्ता – क्रिया करने वाला
- कर्म – क्रिया का जिस पर प्रभाव पड़े
- करण – जिसकी सहायता से क्रिया हो
- सम्प्रदान – जिसके लिए वह हो
- अपादान – जिससे अलग हो
- अधिकरण – क्रिया का आधार
इनके कुछ वाक्य इस प्रकार हैं
जैसे—
- छात्रा: विद्यालयं गच्छति ।
- राकेशः पठति।
- नृपाय धनं ददाति ।
संक्षिप्त रूप से हम कह सकते हैं कि कर्ता कारक में प्रथमा, कर्म कारक में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है। इसी तरह सातों विभक्तियों का प्रयोग होगा।
6. विशेषण / विशेष्य – संज्ञा, सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं तथा जिन शब्दों की विशेषता बताई जा रही है, उन शब्दों को विशेष्य कहते हैं। जो वचन तथा लिङ्ग विशेष्य का होता है, वही विशेषण का भी होता है; जैसे-
- सुन्दरः बालकः
- शोभनाः नार्यः
- कृष्णः सर्पः।
Sanskrit Mein Shabd Vichar Class 7
अभ्यास प्रश्ना:
बहुविकल्पीय एवं वर्णनात्मक प्रश्नोत्तर
1. अधोलिखितेषु क्रियापदेषु एकवचनं, द्विवचनं, बहुवचनं च पृथक्-पृथक् कृत्वा लिखत । (निम्नलिखित क्रियापदों में से एकवचन, द्विवचन और बहुवचन को पृथक्-पृथक् करके लिखिए।)
पठति, खेलिष्यन्ति चलतः, गच्छन्ति, पठामि गच्छावः, वदति, वदामः, वदथः, भवति, भविष्यन्ति, भवामः गच्छेत्, गच्छेयुः, गच्छेताम्।
एकवचनम् – द्विवचनम् – बहुवचनम्
……….. – ……….. – ………..
……….. – ……….. – ………..
……….. – ……….. – ………..
……….. – ……….. – ………..
……….. – ……….. – ………..
उत्तर:
एकवचनम् – द्विवचनम् – बहुवचनम्
पठति – चलतः – खेलिष्यन्ति
पठामि – गच्छावः – गच्छन्ति
वदति – वदथः – वदामः
भवति – भवामः – भविष्यन्ति
गच्छेत् – गच्छेताम् – गच्छेयुः
2. अधोलिखितानां शब्दानां वचनानुसारं उचित स्तम्भे लिखत । (निम्नलिखित शब्दों को वचन के अनुसार उचित स्तम्भ में लिखिए |)
बालकः, बालकाः, बालकौ, फलानि, फलात्, फलाभ्याम्, रमायाम्, लतयोः, रमासु, सा, तौ, ताः, हरिणा, हरिभ्यः, हरिभ्याम्।
एकवचनम् – द्विवचनम् – बहुवचनम्
……….. – ……….. – ………..
……….. – ……….. – ………..
……….. – ……….. – ………..
……….. – ……….. – ………..
……….. – ……….. – ………..
उत्तर:
एकवचनम् – द्विवचनम् – बहुवचनम्
बालकः – बालक – बालकौ – बालकाः
फलात् – फलाभ्याम् – फलानि
रमायाम् – लतयोः – रमासु
सा – तौ – ता:
हरिणा – हरिभ्याम् – हरिभ्यः
3. अधोलिखितेषु वाक्येषु अव्ययपदानि चित्वा लिखत । (निम्नलिखित वाक्यों में से अव्यय पद चुनकर लिखिए।)
- रामः सहसा अवदत् ।
- अधुना अहं कार्यं करिष्यामि ।
- ग्रामात् बहिः मन्दिरम् अस्ति।
- असत्यं मा वदत् ।
- वृद्धः शनैः चलति ।
- पुरा शुद्धोधन नाम राजा आसीत् ।
- अहम् अपि ग्रामं गच्छामि ।
- त्वं कदा गमिष्यसि ?
- मूर्खः उच्चैः हसति ।
- अत्र जलम् अस्ति ।
उत्तर:
- सहसा
- अधुना
- बहि:
- मा
- शनै:
- पुरा
- अपि
- कदा
- उच्चैः
- अत्र
4. अधोलिखितेषु वाक्येषु सर्वनामपदानि क्रियापदानि च चित्वा लिखत। (निम्नलिखित वाक्यों में से सर्वनाम पद व क्रियापद चुनकर लिखिए।)
(i) अहं ग्रामं गच्छामि ।
(ii) ताः बालिकाः नृत्यन्ति ।
(iii) तौ बालकौ खादतः।
(iv) यूयं कुत्र गच्छथ।
(v) वयं भोजनं खादिष्यामः ।
(vi) सः अद्य कुत्र गच्छति?
(vii) ते छात्राः गृहकार्यं कुर्वन्ति ।
(viii) तानि मधुराणि फलानि सन्ति ।
उत्तर:
सर्वनामपदानि
क्रियापदानि
(i) अहं – (i) गच्छामि
(ii) ता: – (ii) नृत्यन्ति
(iii) तौ – (iii) खादत:
(iv) यूयं – (iv) गच्छथ
(v) वयं – (v) खादिष्यामः
(vi) स: – (vi) गच्छति
(vii) ते – (vii) कुर्वन्ति
(viii) तानि – (viii) सन्ति
5. अधोदत्तेषु वाक्येषु संज्ञापदानि विशेषण पदानि च चिनुत । (निम्नलिखित वाक्यों में से संज्ञापद व विशेषण पद चुनिए ।)
(i) उद्याने मधुराणि फलानि सन्ति ।
(ii) अयं सुन्दरः बालकः अस्ति ।
(iii) नीलं कमलम् उद्याने वर्तते।
(iv) वने क्रुद्धः सिंहः अस्ति ।
(v) ग्रामे वीरः पुरुषः वसति ।
(vi) विवेकानन्दः महान् पुरुषः आसीत् ।
उत्तर:
संज्ञापदानि – विशेषणपदानि
(i) उद्याने, फलम् – (i) मधुराणि
(ii) बालकः – (ii) सुन्दर:
(iii) उद्याने, कमलम् – (iii) नीलं
(iv) वने, सिंह: – (iv) क्रुद्धः
(v) ग्रामे, पुरुष: – (v) वीर:
(vi) विवेकानन्दः – (vi) महान्
6. अधोदत्तं पदानां पठत् प्रत्येकं पद परिचयं च यच्छत। (नीचे दिए गए प्रत्येक पदों को पढ़कर उसका परिचय लिखिए |)

उत्तर:

7. अधोलिखितानां शब्दानां विभक्ति अनुसारेण उचित स्तम्भे लिख (निम्नलिखित शब्दों को विभक्ति के अनुसार उचित स्तम्भ में पंचमी विभक्ति सप्तमी विभक्ति लिखिए।)

• मञ्जूषा रामात्, हरिषु, पतिभ्यः सखिभिः, गुरौ, पितृभ्याम्, लतायाम्, हरिणा, ध्वजे, नद्या, नद्यांः, मातुः ।
उत्तर:
पंचमी विभक्ति – सप्तमी विभक्ति – तृतीया विभक्ति
(i) रामात् – हरिषु – सखिभिः
(ii) पतिभ्यः – गुरौ – पितृभ्याम्
(iii) नद्या: – लतायाम् – हरिणा
(iv) मातु: – ध्वजे – नद्या
8. अधोलिखित पदेषु धातवः के सन्ति । (निम्नलिखित पदों में धातु बताइए |)
- पदम् – धातु
- भवसि – ………
- पठानि – ………
- अलिखत् – ………
- हस्तामः – ………
उत्तर:
- पदम् – धातु
- भवसि – भू
- पठानि – पठ्
- अलिखत् – लिख्
- हस्तामः – हस्
9. उचितेन विकल्पेन प्रत्येकं प्रश्नाम् उत्तरम् रिक्तस्थानानि च पूरयत। (प्रत्येक प्रश्न का उचित विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ।)
‘मित्राभ्याम् दत्तं वचनं विस्मृत्य सः अवदत् इति वाक्ये’
- ‘मित्राभ्याम्’ इति पदे का विभक्तिः ? (चतुर्थी, पञ्चमी)
- अवदत् इति क्रियापदस्य कः कर्ता ? (मित्राभ्याम्, सः)
- अवदत् अत्र कः लकारः? (लृट्, लङ्)
उत्तर:
- चतुर्थी
- सः
- लङ्
10. बहुवचनशब्दानां पृथक् कुरुत । (बहुवचन शब्द पृथक् करें।)
मात्रा, मातृभिः, फलैः, एतान्, एतयोः, एतेषाम्, मातृषु
उत्तर:
मातृभि:, फलैः, एतान्, एतेषाम्, मातृषु
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