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Class 9 Hindi झाँसी की रानी Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 11 झाँसी की रानी Extra Question Answer
NCERT Class 9 Hindi Chapter 11 Extra Question Answer अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘झाँसी की रानी’ कविता की कवयित्री कौन हैं?
उत्तर:
‘झाँसी की रानी’ कविता की कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान हैं।
प्रश्न 2.
लक्ष्मीबाई को बचपन में किस नाम से पुकारा जाता था?
उत्तर:
लक्ष्मीबाई को बचपन में ‘छबीली’ और ‘मनु’ नाम से पुकारा जाता था।
प्रश्न 3.
लक्ष्मीबाई किनकी मुँहबोली बहन थीं?
उत्तर:
लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुँहबोली बहन थीं।
प्रश्न 4.
लक्ष्मीबाई के बचपन के प्रिय खेल क्या थे?
उत्तर:
लक्ष्मीबाई के बचपन के प्रिय खेल शिकार खेलना, नकली युद्ध करना, व्यूह की रचना करना और किले तोड़ना थें।
प्रश्न 5.
लक्ष्मीबाई को किन महापुरुषों की गाथाएँ जुबानी याद थीं?
उत्तर:
लक्ष्मीबाई को वीर शिवाजी की वीरतापूर्ण गाथाएँ जुबानी याद थीं।
प्रश्न 6.
झाँसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद कौन खुश हुआ और क्यों?
उत्तर:
झाँसी के राजा की मृत्यु के बाद लॉर्ड डलहौजी खुश हुआ क्योंकि उसे झाँसी के राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने का अवसर मिल गया था।
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प्रश्न 7.
‘झाँसी की रानी’ कविता में ‘काली घटा घेर लाई’ पंक्ति का क्या अर्थ है?
उत्तर:
इस पंक्ति का अर्थ है कि राजा गंगाधर राव की आकस्मिक मृत्यु से झाँसी पर संकट के बादल छा गए थे।
प्रश्न 8.
रानी लक्ष्मीबाई के साथ युद्ध क्षेत्र में किन सखियों ने वीरता दिखाई थी?
उत्तर:
युद्ध क्षेत्र में रानी की सखियाँ ‘काना’ और ‘मंदरा’ ने उनके साथ मिलकर वीरता दिखाई थी।
प्रश्न 9.
रानी लक्ष्मीबाई ने किस शहर पर अधिकार कर सिंधिया को भागने पर मजबूर कर दिया था?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई ने ग्वालियर पर अधिकार कर सिंधिया को वहाँ से भागने पर मजबूर कर दिया था।
प्रश्न 10.
रानी लक्ष्मीबाई किस उम्र में वीरगति को प्राप्त हुई थीं?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में वीरगति को प्राप्त हुई थीं।
झाँसी की रानी Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘झाँसी की रानी’ कविता में ‘बूढ़े भारत’ में ‘नई जवानी’ आने का क्या आशय है?
उत्तर:
‘बूढ़े भारत’ से कवयित्री का आशय उस समय के भारत से है जो लंबे समय की गुलामी के कारण अपना साहस और आत्मविश्वास खो चुका था। ‘नई जवानी’ आने का अर्थ है कि 1857 के विद्रोह ने भारतीयों के भीतर आज़ादी पाने का नया जोश उत्साह और साहस भर दिया था। लोग अपनी खोई हुई आज़ादी को वापस पाने के लिए फिर से संघर्ष करने को तैयार हो गए थें।
प्रश्न 2.
रानी लक्ष्मीबाई का बचपन अन्य लड़कियों के बचपन से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर:
सामान्य लड़कियों का बचपन गुड़ियों से खेलने और घरेलू कार्यों में बीतता था, लेकिन लक्ष्मीबाई का बचपन इससे बिल्कुल अलग था। वे बचपन में खिलौने के स्थान पर बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी जैसे शस्त्रों से खेलती थीं। उनके प्रिय खेल शिकार खेलना, नकली युद्ध करना, व्यूह की रचना करना और दुर्ग तोड़ना थे। उन्हें वीर शिवाजी की गाथाएँ जुबानी याद थीं।
प्रश्न 3.
“किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर:
इस पंक्ति के माध्यम से राजा गंगाधर राव की आकस्मिक और असामयिक मृत्यु की ओर संकेत किया गया है। रानी के विवाह के कुछ समय बाद ही राजा का निधन हो गया, जिससे रानी विधवा हो गईं। झाँसी का सौभाग्य दुर्भाग्य में बदल गया और संतान न होने के कारण झाँसी के अस्तित्व पर अंग्रेजों के कब्ज़े का संकट मँडराने लगा?
प्रश्न 4.
राजा गंगाधर राव की मृत्यु पर डलहौजी के प्रसन्न होने का क्या कारण था?
उत्तर:
राजा गंगाधर राव निःसंतान मरे थे। उस समय अंग्रेजों की ‘लैप्स नीति’ के अनुसार, यदि किसी रियासत का राजा बिना उत्तराधिकारी के मर जाता था, तो उस राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया जाता था। डलहौजी को झाँसी को हड़पने का यह कानूनी और आसान अवसर मिल गया था, इसलिए वह बहुत प्रसन्न था।
प्रश्न 5.
“महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
उत्तर:
स्वतंत्रता संग्राम में उक्त पंक्ति का बहुत गहरा महत्व है। पंक्ति यह दर्शाती है कि 1857 का स्वतंत्रता संग्राम केवल राजाओं या सैनिकों तक सीमित नहीं था। इसमें महलों में रहने वाले राजाओं और झोंपड़ियों में रहने वाली सामान्य जनता, दोनों ने एकजुट होकर भाग लिया था। यह विद्रोह समाज के सभी वर्गों की एकता और अंग्रेजों के प्रति साझा आक्रोश का प्रतीक था।
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Class 9 Hindi Chapter 11 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
रानी लक्ष्मीबाई के चरित्र की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिन्होंने उन्हें 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे प्रभावशाली हस्ती बना दिया?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई का चरित्र अदम्य साहस, , देशभक्ति और स्वाभिमान का अद्भुत संगम था। उनकी निम्नलिखित विशेषताओं ने उन्हें अमर बना दिया-
- युद्ध-कौशल और वीरता – वे बचपन से ही अस्त्र-शस्त्र चलाने, व्यूह-रचना और दुर्ग तोड़ने की कला में निपुण थीं। उन्होंने अकेले ही अंग्रेजों की विशाल सेना का मुकाबला किया।
- नेतृत्व क्षमता – उन्होंने न केवल अपनी सखियों काना और मंदरा को, बल्कि झाँसी की जनता और अन्य क्रांतिकारी नेताओं को भी एक सूत्र में पिरोया।
- स्वाभिमान – जब डलहौजी ने झाँसी को लावारिस मानकर कब्ज़ा करना चाहा, तब उन्होंने हार मानने की बजाय संघर्ष का रास्ता चुना और कहा, “मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी।”
- प्रेरणादायी व्यक्तित्व – उनकी वीरता ने सोए हुए भारत में ‘नई जवानी’ फूँक दी। वे मात्र योद्धा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की प्रतीक बन गईं।
प्रश्न 2.
“सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी” – इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री तत्कालीन भारत की किस राजनीतिक स्थिति का चित्रण करना चाहती हैं?
उत्तर:
उक्त पंक्ति के माध्यम से कवयित्री ने 1857 की क्रांति से ठीक पहले की विस्फोटक राजनीतिक स्थिति का चित्रण किया है-
- अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति – ईस्ट इंडिया कंपनी ने छल-कपट और ‘लैप्स नीति’ द्वारा एक-एक करके भारतीय रियासतों को हड़पना शुरू कर दिया था।
- राजवंशों का आक्रोश – जब अंग्रेजों ने नवाबों और राजाओं के राज्यों को छीना, तो उनके सिंहासन डोलने लगे। अपमानित राजाओं की भौहें क्रोध से तन गईं।
- राष्ट्रीय चेतना – वर्षों की गुलामी के बाद शासक वर्ग को अपनी खोई हुई आजादी की कीमत समझ आने लगी थी।
- विद्रोह की तैयारी – महलों से लेकर सामान्य जनता तक, हर तरफ अंग्रेजों के प्रति नफरत और आज़ादी पाने का संकल्प गहराने लगा था, जिसने अंततः प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का रूप ले लिया।
आपकी सोच
प्रश्न 1.
यदि रानी लक्ष्मीबाई के समय सभी भारतीय राजा एकजुट होते और कुछ राजाओं ने अंग्रेजों का साथ न दिया होता, तो क्या भारत 1857 में ही आज़ाद हो जाता? अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
यदि उस समय सिंधिया जैसे राजाओं ने अंग्रेजों का साथ न दिया होता और सभी रियासतें एक साझा लक्ष्य के साथ एकजुट होकर लड़तीं, तो भारत की आज़ादी का इतिहास कुछ और होता। 1857 का विद्रोह बहुत शक्तिशाली था, लेकिन इसमें ‘एकता’ और ‘केंद्रीय नेतृत्व’ की कमी थी। यदि पूरा भारत एक साथ खड़ा होता, तो अंग्रेजों की सीमित सैन्य शक्ति उस व्यापक जन आक्रोश को दबा नहीं पाती और संभवतः भारत बहुत पहले ही स्वतंत्र हो जाता।
प्रश्न 2.
“खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी” – इस पंक्ति में ‘मर्दानी’ शब्द का प्रयोग रानी के लिए क्यों किया गया है? क्या वीरता केवल पुरुषों का गुण है?
उत्तर:
“झाँसी की रानी” कविता में ‘मर्दानी’ शब्द का प्रयोग रानी के उस अदम्य साहस और युद्ध कौशल को दर्शाने के लिए किया गया है, जिसे उस समय के समाज में केवल पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था। मेरी समझ से, वीरता किसी लिंग की जागीर नहीं है। रानी लक्ष्मीबाई ने यह साबित किया कि एक महिला भी युद्ध के मैदान में पुरुषों से अधिक वीरता और कुशलता दिखा सकती है। यहाँ ‘मर्दानी’ शब्द रानी की शक्ति को कम नहीं करता, बल्कि यह उस रूढ़िवादी सोच पर प्रहार करता है जो महिलाओं को कमजोर मानती थी। रानी स्वयं में ‘वीरता की अवतार’ थीं।
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Class 9 Ganga Chapter 11 Extra Question Answer अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
दिए गए काव्यांशों को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
काव्यांश – 1
कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,
वीर शिवाजी की गाथाएँ
उसको याद जबानी थीं।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 177)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
“पिता की वह संतान अकेली थी” – इस पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर:
उक्त पंक्ति का आशय यह है कि लक्ष्मीबाई अपने पिता की इकलौती संतान थीं। उनका पालन-पोषण लाड़-प्यार और गौरव के साथ हुआ था, जिसके कारण उन्हें शस्त्र विद्या और शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर मिला।
प्रश्न 2.
लक्ष्मीबाई का बचपन अन्य बालिकाओं से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर:
जहाँ सामान्य बालिकाएँ गुड़िया और खिलौनों से खेलती थीं, वहीं लक्ष्मीबाई का बचपन बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी जैसे शस्त्रों के साथ बीता। वे नाना साहब के साथ पढ़ती और खेलती थीं और शिकार खेलना, व्यूह रचना करना तथा दुर्ग तोड़ना ही उनके प्रिय खेल थे।
काव्यांश – 2
उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई,
निःसंतान मरे राजाजी
रानी शोक-समानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 178)
लघूत्तरात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
“तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई” – इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उक्त पंक्ति का भाव यह है कि भाग्य या नियति को रानी लक्ष्मीबाई के उन हाथों में चूड़ियाँ (सौभाग्य का प्रतीक देखना) स्वीकार नहीं थीं जो हाथ केवल तीर और तलवार जैसे शस्त्र चलाने के लिए बने थे। यहाँ कवयित्री ने रानी के विवाह के अल्प समय बाद ही उनके पति की मृत्यु और उनके विधवा होने की त्रासदी को बहुत ही मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है।
प्रश्न 2.
राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद रानी की मनोदशा कैसी थी?
उत्तर:
राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद रानी लक्ष्मीबाई गहरे शोक में डूबी हुई थीं। कवयित्री ने उनके लिए ‘शोक – समानी’ शब्द का प्रयोग किया है, जिसका अर्थ है कि वे पूरी तरह शोक में डूबी हुई थीं। उनके लिए यह समय अत्यंत कठिन था क्योंकि वे कम उम्र में विधवा हो गई थीं और झाँसी का भविष्य भी संकट में था।
काव्यांश – 3
अनुनय-विनय नहीं सुनता है, विकट फ़िरंगी की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया,
रानी दासी बनी, बनी यह
दासी अब महरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 179)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
“रानी दासी बनी बनी यह दासी अब महरानी थी” – इस पंक्ति का आशय क्या है?
उत्तर:
उक्त पंक्ति का आशय है कि अंग्रेजों की हड़प नीति के कारण जब झाँसी उनके अधीन हो गई, तब स्वतंत्र राज्य की रानी एक दासी के समान विवश हो गई। दूसरी ओर, अंग्रेजों की क्वीन विक्टोरिया, अब भारत की महारानी बनकर शासन करने लगी थीं।
प्रश्न 2.
अंग्रेज अधिकारी डलहौली की क्या नीति थी?
उत्तर:
डलहौली की नीति बहुत क्रूर और विस्तारवादी थी। वह किसी की प्रार्थना नहीं सुनता था। उसने चालाकी से भारतीय राजाओं और नवाबों के राज्यों को हड़पना शुरू कर दिया और उन शासकों को अपमानित कर उनके अधिकारों को पैरों तले रौंद दिया।
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काव्यांश – 4
कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था, अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चंडी का कर दिया प्रकट आह्वान,
हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो
सोई ज्योति जगानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 180)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
‘कुटियों’ और ‘महलों की स्थिति में क्या समानता दिखाई गई है?
उत्तर:
काव्यांश के अनुसार, कुटियों में रहने वाले गरीब लोग ‘विषम वेदना’ में थे और महलों में रहने वाले राजा-महाराजा अपने ‘आहत अपमान’ अर्थात अंग्रेजों द्वारा किए गए तिरस्कार से दुखी थे। समानता यह थी कि दोनों ही वर्ग अंग्रेजों के शासन से परेशान और असंतुष्ट थे।
प्रश्न 2.
रानी लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ क्यों कहा गया है और उनका मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
‘छबीली’ रानी लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम था, जिसका अर्थ सुंदर या चंचल होता है। उसका मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता का ‘यज्ञ’ प्रारंभ करके देशवासियों के मन में सोई हुई आज़ादी की भावना को जगाना और अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध का बिगुल फूँकना था।
काव्यांश – 5
महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी.
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थीं,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपुर, कोल्हापुर में भी
कुछ हलचल उकसानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 180)
लघूत्तरात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
‘झाँसी चेती, दिल्ली चेती’ में ‘चेती’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर:
‘चेती’ का अर्थ है- जागृत होना या सचेत होना । यह दर्शाता है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान झाँसी और दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण नगरों के लोग अंग्रेजों की गुलामी के विरुद्ध सचेत हो गए थे और आज़ादी के लिए संघर्ष करने को तैयार थे।
प्रश्न 2.
काव्यांश के अनुसार क्रांति की लपटें किन-किन क्षेत्रों तक पहुँच चुकी थीं?
उत्तर:
काव्यांश के अनुसार क्रांति की ज्वाला झाँसी, दिल्ली और लखनऊ से शुरू होकर मेरठ, कानपुर और पटना जैसे उत्तर भारतीय शहरों तक फैल गई थी। इसके साथ ही इसका प्रभाव मध्य और पश्चिम भारत के जबलपुर और कोल्हापुर जैसे सुदूर क्षेत्रों में भी हलचल के रूप में देखा जा सकता था।
काव्यांश – 6
इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अजीमुल्ला सरनाम,
अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास – गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम,
लेकिन आज जुर्म कहलाती
उनकी जो कुरबानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी। (पृष्ठ 181)
लघूत्तरात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
इस काव्यांश में किन-किन प्रमुख वीर सेनानियों के नाम आए हैं?
उत्तर:
इस काव्यांश में नाना धुंधूपंत ताँतिया टोपे, चतुर अजीमुल्ला खाँ, अहमद शाह मौलवी और ठाकुर कुँवरसिंह जैसे वीर सेनानियों के नाम आए हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपना अमूल्य योगदान दिया।
प्रश्न 2.
“लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी” पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस पंक्ति का अर्थ है कि भारतीय वीरों ने देश को आज़ाद कराने के लिए जो बलिदान और त्याग किया, तत्कालीन ब्रिटिश शासक उसे वीरता न मानकर एक ‘जुर्म’ या ‘राजद्रोह’ मानते थे। अंग्रेजों के लिए अपनी आजादी की माँग करना कानून के खिलाफ एक अपराध था।
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काव्यांश – 7
इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में,
जख्मी होकर वॉकर भागा,
उसे अजब हैरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 181)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
‘द्वंद्व असमानों में’ पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर:
इस पंक्ति का आशय यह है कि युद्ध दो ऐसे योद्धाओं के बीच था जो एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न थे। एक ओर अंग्रेज अधिकारी वॉकर
अपनी सेना के साथ था, तो दूसरी ओर एक भारतीय नारी रानी लक्ष्मीबाई थी जिसने अपनी अद्भुत वीरता से वॉकर जैसे प्रशिक्षित सैनिक को भी चकित कर दिया था।
प्रश्न 2.
रानी की वीरता देखकर वॉकर को ‘अजब हैरानी’ क्या. हुई?
उत्तर:
वॉकर को अजब हैरानी इसलिए हुई क्योंकि उसने एक महिला से इतने भीषण आक्रमण और युद्ध – कौशल की अपेक्षा नहीं की थी। रानी लक्ष्मीबाई ने जिस निडरता से तलवार चलाई और उसे घायल कर मैदान छोड़ने पर मजबूर कर दिया, वह वॉकर के लिए अविश्वसनीय था।
काव्यांश – 8
रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेजों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी किया ग्वालियर पर अधिकार,
अंग्रेजों के मित्र सिंधिया
ने छोड़ी रजधानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 181-182)
लघूत्तरात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
यमुना-तट पर अंग्रेजों की क्या स्थिति हुई?
उत्तर:
यमुना तट पर रानी लक्ष्मीबाई और अंग्रेजों के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसमें अंग्रेजों को एक बार फिर रानी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। इस विजय के बाद रानी वीरतापूर्वक आगे बढ़ती रहीं।
प्रश्न 2.
‘गया स्वर्ग तत्काल सिधार’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस पंक्ति का भाव यह है कि रानी का स्वामिभक्त घोड़ा, जो निरंतर सौ मील तक दौड़कर उन्हें कालपी तक लाया था, थकान के कारण भूमि पर गिर पड़ा और उसकी तुरंत मृत्यु हो गई। यहाँ घोड़े की मृत्यु को ‘स्वर्ग सिधारना’ कहकर उसके बलिदान को सम्मानित किया गया है।
काव्यांश – 9
विजय मिली, पर अंग्रेजों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के सँग आई थीं,
युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी,
पर, पीछे ह्यू रोज आ गया,
हाय! घिरी अब रानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 182)
लघूत्तरात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
काना और मंदरा ने युद्ध क्षेत्र में अपनी वीरता का परिचय कैसे दिया?
उत्तर:
काना और मंदरा रानी लक्ष्मीबाई की प्रिय सखियाँ थीं। उन्होंने युद्ध क्षेत्र में केवल रानी का साथ ही नहीं दिया, बल्कि अपनी तलवारों से अंग्रेजों की सेना में ‘भारी मार’ मचाई और अद्भुत साहस का परिचय देते हुए अनेक शत्रुओं को मार गिराया।
प्रश्न 2.
“हाय! घिरी अब रानी थी” पंक्ति के माध्यम से कवयित्री क्या कहना चाहती हैं?
उत्तर:
इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री युद्ध की एक कठिन और विपरीत स्थिति का वर्णन कर रही हैं। एक ओर रानी ने सामने से आ रहे जनरल स्मिथ को हरा दिया था, लेकिन तभी पीछे से अंग्रेज अधिकारी ह्यूरोज़ अपनी सेना लेकर आ गया। इस प्रकार रानी चारों ओर से अंग्रेजी सेनाओं के बीच घिर गईं, जो उनके लिए अत्यंत संकटपूर्ण स्थिति थी।
काव्यांश – 10
तो भी रानी मार-काटकर चलती बनी सैन्य के पार,
किंतु सामने नाला आया था यह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गए सवार,
रानी एक शत्रु बहुतेरे होने लगे वार पर वार,
घायल होकर गिरी सिंहनी
उसे वीर गति पानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 182)
लघूत्तरात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
‘घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था’-इस पंक्ति का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रानी का पुराना और विश्वसनीय घोड़ा पहले ही वीरगति प्राप्त कर चुका था। इस अंतिम युद्ध में रानी के पास एक नया घोड़ा था। जब सामने एक बड़ा नाला आया तो अनुभवहीन होने के कारण वह नया घोड़ा वहीं रुक गया, जिसके कारण रानी शत्रुओं से घिर गईं।
प्रश्न 2.
रानी लक्ष्मीबाई ने वीरगति प्राप्त कर किस प्रकार इतिहास में अपना नाम अमर किया?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई अंत तक अकेले ही शत्रुओं से लड़ती रहीं। जब उनका घोड़ा नाले पर रुक गया, तब शत्रुओं ने उन पर चारों ओर से प्रहार करना शुरू कर दिया। वे एक घायल सिंहनी की तरह साहसपूर्वक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, लेकिन उन्होंने अंतिम साँस तक हार नहीं मानी और अपनी मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
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काव्यांश – 11
रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी,
दिखा गई पथ, सिखा गई
हमको जो सीख सिखानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ 183)
लघूत्तरात्मक प्रश्न:
प्रश्न 1.
कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई को ‘मनुज नहीं अवतारी थी’ क्यों कहा है?
उत्तर:
कवयित्री के अनुसार रानी लक्ष्मीबाई ने केवल तेईस वर्ष की अल्पायु में जो वीरता और साहस दिखाया, वह किसी साधारण मनुष्य के लिए संभव नहीं था। उनके अद्भुत कार्यों और देश को स्वतंत्रता का मार्ग दिखाने के कारण उन्हें साधारण स्त्री न मानकर ईश्वर का एक अवतार माना गया है।
प्रश्न 2.
रानी लक्ष्मीबाई हमें क्या सीख देकर गई?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई अपने बलिदान के माध्यम से हमें स्वतंत्रता के मार्ग पर चलने और अन्याय के विरुद्ध अंत तक लड़ने की सीख देकर गई। उन्होंने सोए हुए देशवासियों को जगाया और यह साबित किया कि नारी शक्ति किसी भी बाधा को पार कर सकती है।
Class 9 Hindi Chapter 11 Extra Question Answer for Practice
काव्यांश पर आधारित प्रश्न
जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारत वासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी,
तेरा स्मारक तू ही होगी,
तू खुद अमिट निशानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी। (पृष्ठ 183)
लघूत्तरात्मक प्रश्नः
प्रश्न 1.
युद्ध क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई ने किन अंग्रेज अधिकारियों का सामना किया और उनका क्या परिणाम हुआ?
प्रश्न 2.
“रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार” – इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री रानी की किस विशेषता को उजागर कर रही है?
बहुविकल्पी प्रश्नः
प्रश्न 1.
“काना और मंदरा” कौन थीं?
(क) झाँसी की रानी
(ख) लक्ष्मीबाई की सखियाँ
(ग) अंग्रेज सेना के जासूस
(घ) राजकुमारियाँ
प्रश्न 2.
“छोड़ चला था सिंधिया अपनी राजधानी” – इस पंक्ति से सिंधिया के किस व्यवहार का पता चलता है?
(क) वह रानी की वीरता से डरकर भाग गया था।
(ख) वह अपनी प्रजा के लिए नए राज्य की खोज में था।
(ग) वह अंग्रेज का मित्र था और रानी के डर से राजधानी छोड़ दी थी।
(घ) वह तीर्थयात्रा पर जा रहा था।
प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उचित विकल्प को चुनकर लिखिए-
कथन – A : रानी लक्ष्मीबाई ने ग्वालियर पर अधिकार कर लिया था
कारण – R : ग्वालियर के शासक सिंधिया अंग्रेजों के मित्र थे और वे रानी के आने पर अपनी राजधानी छोड़ भाग खड़े हुए।
विकल्पः
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
‘झाँसी की रानी’ कविता के अनुसार, लक्ष्मीबाई किसकी मुँहबोली बहन थी?
(क) शिवाजी की
(ख) नाना साहब की
(ग) सिंधिया की
(घ) राजा गंगाधर राव की
प्रश्न 2.
लक्ष्मीबाई के बचपन के प्रिय खेल क्या थे?
(क) गुड़ियों से खेलना
(ख) चित्रकारी सीखना
(ग) शिकार खेलना, व्यूह रचना और दुर्ग तोड़ना
(घ) शतरंज खेलना
प्रश्न 3.
“बुझे दीप झाँसी के” पंक्ति का क्या अर्थ है?
(क) झाँसी में अँधेरा हो जाना
(ख) झाँसी की रानी का विधवा हो जाना
(ग) राजा गंगाधर राव की मृत्यु होना
(घ) अंग्रेज़ों का झाँसी पर कब्ज़ा करना।
प्रश्न 4.
राजा की मृत्यु के बाद कौन ‘हर्षित हुआ?
(क) जनरल स्मिथ
(ख) डलहौजी
(ग) युरोज़
(घ) वॉकर
प्रश्न 5.
रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु किस कारण हुई?
(क) वे युद्ध में हार गई
(ख) उनका नया घोड़ा अड़ गया और शत्रुओं से घिर गईं
(ग) उन्हें बीमारी हो गई थीं
(घ) ग्वालियर के राजा ने उन्हें धोखा दिया था।
अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
सुभद्रा कुमारी चौहान को किन रचनाओं के लिए ‘सेकसरिया पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया?
प्रश्न 2.
“झाँसी की रानी” कविता किस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है?
प्रश्न 3.
लक्ष्मीबाई के बचपन के दो नाम कौन से थे?
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लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
“सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलामी’ से क्या तात्पर्य है?
प्रश्न 2.
‘झाँसी की रानी’ कविता में रानी लक्ष्मीबाई को ‘अवतारी’ क्यों कहा गया है?
प्रश्न 3.
रानी लक्ष्मीबाई का चरित्र चित्रण कीजिए।
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर रानी लक्ष्मीबाई के बचपन और उनकी शिक्षा-दीक्षा का वर्णन कीजिए। यह सामान्य बालिकाओं से किस प्रकार भिन्न था?
प्रश्न 2.
“झाँसी की रानी” कविता में आए विभिन्न भौगोलिक स्थानों (दिल्ली, मेरठ, कानपुर, लखनऊ, जबलपुर, कोल्हापुर) के उल्लेख का क्या महत्व है? यह 1857 की क्रांति के विस्तार के बारे में क्या बताता है?
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