Teachers recommend Class 7 Social Science Notes in Hindi and Class 7 SST Chapter 1 Notes in Hindi भारत की भौगोलिक विविधता for mastering important definitions and key concepts.
Geographical Diversity of India Class 7 Notes in Hindi
भारत की भौगोलिक विविधता Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 नोट्स भारत की भौगोलिक विविधता
प्रस्तावना
→ क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत दुनिया का सातवाँ सबसे बड़ा देश है और एशिया महाद्वीप का भाग है।
→ हिमालय पर्वत के दक्षिण में अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण भारत, अपने पड़ोसी देशों के साथ, सामूहिक रूप में भारतीय उपमहाद्वीप के रूप में जाना जाता है।
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→ सामान्यतः भारत को निम्न पाँच भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है-
- महान हिमालय
- विशाल मैदान
- थार मरुस्थल
- दक्षिणी प्रायद्वीप
- द्वीपसमूह
→ हिमालय पर्वत (महान हिमालय)-हिमालय विश्व की सबसे नवीनरम एवं ऊँची पर्वत श्रंखला है। इसकी सबसे ऊँची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट ( 8848 मी.) है। भारत में हिमालय गंगा, बह्मपुत्र और सिंधु नदियों एवं इनकी सहायक नदियों की उत्पत्ति का स्रोत है जो भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग में जल

का महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत में हिमालय को देवभूमि के रूप में भी जाना जाता है। हिमालय में अनेक प्रसिद्ध मंदिर एवं मठ स्थित हैं जो अध्यात्मिकता की खोज करने वाले बहुत-से लोगों को अपनी और आकर्षित करते हैं।
हिमालय का निर्माण कैसे हुआ?….
एक रोचक कथा:
→ करोड़ों वर्ष पूर्व भारत वर्तमान अफ्रीका महाद्वीप के निकट ‘गोंडवाना’ भू-भाग का भाग था। कालांतर में प्लेट विवर्तनिक प्रकिया के फलस्वरूप यह भाग यहाँ से अलग होकर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर गति करने लगा।
→ आगे बढ़ने के क्रम में यह उत्तर में स्थित विशाल यूरेशिया प्लेट से टकरा गया जिसके फलस्वरूप इन दोनों प्लेटों के मध्य की भूमि मोड़दार पर्वतों के रूप में ऊपर उठ गई जिससे विशाल हिमालय पर्वतों का निर्माण हुआ।
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→ हिमालय पर्वत को तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है-

- हिमाद्री ( वृहद हिमालय )-हिमालय की यह श्रेणी सबसे ऊँची है जो वर्ष-भर बर्फ से ढकी रहती है। विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटियाँ यहीं पाई जाती हैं।
- हिमाचल (लघु हिमालय) -यह हिमाद्री पर्वत शृंखला के दक्षिण में स्थित है। यहाँ समशीतोष्ण जलवायु के कारण अनेक लोकप्रिय पर्यटन स्थल स्थित हैं, जैसे-शिमला, नैनीताल, मसूरी आदि।
- शिवालिक पहाड़ियाँ (बाह्य हिमालय) यह हिमालय की सबसे दक्षिणतम श्रृंखला है जिसके दक्षिण में गंगा का मैदान स्थित है। यह शृंखला घने जंगलों तथा वन्यजीवों से समृद्ध है।
भारत का शीत मरुस्थल:
लद्दाख को भारत के शीत मरुस्थल के रूप में भी जाना जाता है, जहाँ सर्दियों का तापमान -30° सेल्सियस तक गिर जाता है। यहाँ स्थित गहरी घाटियों और ऊँचे पहाड़ों के साथ यह एक ऊबड़-खाबड़

चट्टानी क्षेत्र हैं। यहाँ वर्षा बहुत कम होती है और अधिकांश समय सूखा रहता है। इस क्षेत्र को ‘मूनलैंड’ ‘भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ की भूमि की सतह, चंद्रमा की सतह की भाँति प्रतीत होती है। लद्दाख को इसकी अनेक सुंदर झीलों जिन्हें ‘त्सो’ कहा जाता है, के रूप में भी जाना जाता है। जैसे यहाँ की प्रसिद्ध झील पैंगोंग को ‘पैंगोंग त्सो’ कहा जाता है। यहाँ हिम तेंदुए, आइबेक्स और तिब्बती मृग जैसे प्रमुख वन्यजीव पाए जाते हैं।


→ गंगा के मैदान-गंगा का मैदान हिमालय पर्वत के दक्षिण में तथा प्रायद्वीपीय पठार के उत्तर में स्थित है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से निम्न तीन नदी प्रणालियों द्वारा निर्मित एवं पोषित है-
- गंगा नदी प्रणाली
- सिंधु नदी प्रणाली
- ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली
ये तीनों नदी प्रणाली इस मैदान को अत्याधिक उपजाऊ और कृषि के लिए आदर्श बनाती हैं। भारत की जनसंख्या का एक बड़ा भाग इस मैदान में रहता है।
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विशाल भारतीय मरुस्थल ( थार मरुस्थल )भारत के पश्चिम में एक पीलापन लिए हुए सुनहरी रेत के टीलों का विशाल विस्तार ही थार मरुस्थल कहलाता है। यह एक विशाल, शुष्क जलवायु वाला क्षेत्र है जो मानव और पशु आवागमन को बाधित करता है और एक प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करता है। यह विशाल शुष्क क्षेत्र राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा राज्यों में फैला हुआ है। अरावली पर्वत श्रृंखला एक प्राकृतिक अवरोध के रूप में मरुस्थल का पूर्व की ओर विस्तार होने से रोकती है। यहाँ संगमरमर, ग्रेनाइट, जस्ता और ताँबा जैसे खनिज पाए जाते हैं।

प्रायद्वीपीय पठार-प्रायद्वीपीय पठार देश के मध्य और दक्षिण में स्थित एक त्रिकोणीय प्रायद्वीपीय क्षेत्र है। यह पठार पूर्व में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर और दक्षिण में हिंद महासागर से घिरा हुआ है। दो प्रमुख पर्वत भृंखलाएँ, पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट इस पठार की सीमा पर है। इस क्षेत्र में समृद्ध खनिज संसाधन, घने जंगल और उपजाऊ भूमि है जो इसे आर्थिक रूप से समृद्ध बनाती है। गोदावरी नदी, महानदी, कृष्णा और कावेरी जैसी पूर्व दिशा में बहने वाली नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। नर्मदा और ताप्ती जैसी पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं। अनेक सुंदर झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, जो जलविद्युत पैदा करने और सिंचाई प्रदान करने में भी सहायक हैं।
→ भारत की अद्वितीय तट रेखा-भारत की तट रेखा के साथ-साथ अनेक सुंदर तट, चट्टानी टीले और हरे-भरे जंगल हैं। भारत की तट रेखा की लंबाई 7500 कि.मी. है।
→ पश्चिमी तट-यह गुजरात से केरल तक विस्तृत है, जो गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों से होकर गुजरता है। पश्चिमी तट की दो प्रमुख नदियाँ-नर्मदा और ताप्ती एस्चुरी बनाती है। यह तट रेखा छोटी नदियों और जलोढ़ निक्षेपों द्वारा जमा की गई जलोढ़ मिट्टी तथा अन्य भू-आकृतियों जैसे-सँकरी खाड़ियों (क्रीक्स), एस्चुरी आदि से बनी है। पश्चिमी तट पर अनेक महत्वपूर्ण बंदरगाह और शहर हैं, जो प्राचीन काल से ही आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं।

→ पूर्वी तट-यह तट गंगा नदी के डेल्टा से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इसमें विस्तृत मैदान और अनेक प्रमुख नदी डेल्टा स्थित हैं। गोदावरी, कावेरी, कृष्णा और महानदी इस तट पर बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली प्रमुख नदियाँ हैं और डेल्टा बनाती हैं। चिल्का झील और पुलिकट झील इस तट के साथ स्थित दो प्रमुख लैगून झीलें हैं।

भारतीय द्वीपसमूह-भारत में मुख्य रूप से निम्न दो द्वीपसमूह स्थित हैं-
→ लक्षद्वीप समूह-यह 36 द्वीपों का समूह है जिनका निर्माण प्रवाल जीवों से हुआ है। यह अरब सागर में स्थित है।
→ अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह-यह द्वीपसमूह 500 से अधिक छोटे-बड़े द्वीपों से मिलकर बना है। इन द्वीपों को दो अलग-अलग समूहों, अंडमान द्वीपसमूह तथा निकोबार द्वीपसमूह में विभाजित किया जाता है। यहाँ विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव-जंतु पाए जाते हैं। ब्रिटिश काल में हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को यहाँ स्थित ‘सेल्युलर जेल’ में रखा जाता था।
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→ पश्चिम बंगाल और सुंदरवन डेल्टा-सुंदरवन, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी डेल्टा में स्थित है। यह डेल्टा एक नदी, समुद्र और भूमि का एक अनूठा संयोजन है। सुंदरवन यूनेस्को धरोहर है। सुंदरवन की मुख्य वन्य प्रजाति रॉयल बंगाल टाइगर है।
→ पूर्वोत्तर की पहाड़ियाँ-पूर्वोत्तर की पहाड़ियाँ मुख्यतः मेघालय पठार का भाग है, जो भारी वर्षा, सुंदर झरनों और हरे-भरे वनों के लिए प्रसिद्ध है। गारो, खासी, जयंतिया इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण पहाड़ियाँ हैं। ये विश्व के सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक हैं।
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